गुजरात में NCC कैडेट्स के लिए बड़ा कदम, अब निजी स्कूलों के छात्रों को भी मिलेगी सरकारी वित्तीय मदद
गुजरात में नेशनल कैडेट कोर (NCC) के हज़ारों छात्रों के लिए एक बड़ी असमानता समाप्त कर दी गई है। राज्य सरकार ने अब निजी स्कूलों और कॉलेजों के उन NCC कैडेट्स को भी वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है…
गुजरात में नेशनल कैडेट कोर (NCC) के हज़ारों छात्रों के लिए एक बड़ी असमानता समाप्त कर दी गई है। राज्य सरकार ने अब निजी स्कूलों और कॉलेजों के उन NCC कैडेट्स को भी वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है, जो राष्ट्रीय स्तर के शिविरों के लिए चुने जाते हैं। अब तक यह सुविधा केवल सरकारी संस्थानों के कैडेट्स को ही मिलती थी, जिससे निजी संस्थानों के छात्रों को सारा खर्च खुद उठाना पड़ता था।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के बाद निजी संस्थानों के कैडेट्स को भी सरकारी संस्थानों के छात्रों की तरह ही समान आधार पर भत्ता मिलेगा। राज्य सरकार इन शिविरों से जुड़ा 100 प्रतिशत खर्च वहन करेगी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा तय दरों पर भत्ते दिए जाएंगे। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली कैडेट को सिर्फ इसलिए मौका न गंवाना पड़े क्योंकि वह एक निजी संस्थान में पढ़ता है।
समान अवसर, समान अधिकार
यह महत्वपूर्ण फैसला मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में हुई एक बैठक में लिया गया, जिसमें शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकम छांगा भी शामिल थे। सरकार ने माना कि वित्तीय बाधाओं के कारण कई होनहार कैडेट, जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता थी, चयन प्रक्रिया में भाग लेने से हतोत्साहित हो जाते थे। इस नई व्यवस्था से अब चयन का आधार कैडेट की आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि उनका प्रदर्शन, प्रतिभा और मेहनत होगी।
किन शिविरों पर लागू होगा यह फैसला?
इस निर्णय के दायरे में कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के शिविर शामिल हैं। इनमें गणतंत्र दिवस दल (RDC), थल सैनिक शिविर (TSC), युवा विनिमय कार्यक्रम (YEP), वायु सैनिक शिविर (VSC), नौसेना सैनिक शिविर (NSC) और अन्य राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम (NLE) शामिल हैं। इन शिविरों के लिए चयन प्रक्रिया काफी प्रतिस्पर्धी होती है, जिसमें कैडेटों को कई स्तरों से गुजरना पड़ता है। अब इस खर्च में भोजन, यात्रा, आकस्मिक व्यय और पेट्रोल-तेल जैसी चीजें शामिल होंगी, जिसे पूरी तरह सरकार वहन करेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से निजी संस्थानों के अधिक छात्र राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे।
इनपुट: IANS



