गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: POCSO मामलों में न्याय की रफ्तार तेज, 5 साल में 900 से ज्यादा को उम्रकैद

गुजरात में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्याय प्रक्रिया ने खासी तेजी पकड़ी है। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में अदालतों ने POCSO एक्ट के तहत 1,785 मामलों…

गुजरात: POCSO मामलों में न्याय की रफ्तार तेज, 5 साल में 900 से ज्यादा को उम्रकैद
(फोटो: IANS)

गुजरात में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्याय प्रक्रिया ने खासी तेजी पकड़ी है। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में अदालतों ने POCSO एक्ट के तहत 1,785 मामलों में फैसला सुनाया है, जिसमें 908 दोषियों को आजीवन कारावास की कठोर सजा मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में 16 दोषियों को मौत की सजा भी सुनाई गई है।

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इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में बाल यौन शोषण के खिलाफ 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाई जा रही है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इस पर कहा, "गुजरात में बच्चियों पर बुरी नजर डालने वालों के लिए कोई रहम या नरमी नहीं हो सकती।" उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में फास्ट-ट्रैक अदालतों और मजबूत कानूनी ढांचे के निर्माण का श्रेय देते हुए बताया कि अब पीड़ितों को न्याय के लिए महीनों या सालों का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।

जांच और सुनवाई में अभूतपूर्व तेजी

पुलिस की जांच प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय गति आई है। ज्यादातर मामलों में 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा रही है, जिससे फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई जल्द शुरू हो पा रही है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 140 मामलों में चार्जशीट 1 से 15 दिन के भीतर, 1,339 मामलों में 16 से 30 दिन में और 5,463 मामलों में 31 से 45 दिनों के अंदर दायर की गई।

इसका एक हालिया उदाहरण कलोल का मामला है, जहां एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 15 वर्षीय लड़की के अपहरण और यौन उत्पीड़न के दोषी 42 वर्षीय व्यक्ति को चार्जशीट दाखिल होने के महज 72 घंटे के भीतर उम्रकैद की सजा सुनाई।

सख्त सजा का बढ़ता ग्राफ

फैसलों और सजा की संख्या में साल-दर-साल वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, जहां साल 2022 में 194 फैसले आए, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 499 हो गई। साल 2026 के पहले आठ महीनों में ही 346 फैसले सुनाए जा चुके हैं, जिनमें 241 आजीवन कारावास और 2 मौत की सजा शामिल हैं।

पुलिस महानिदेशक जी.एस. मलिक ने बताया कि पुलिस 'गहन जांच, सख्त कार्रवाई और त्वरित न्याय' के सिद्धांत पर काम कर रही है ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। हर्ष संघवी ने कलोल मामले का जिक्र करते हुए कहा, "सिर्फ 72 घंटे में फैसला आना गुजरात पुलिस की वैज्ञानिक जांच और न्यायपालिका के सख्त और सराहनीय दृष्टिकोण का नतीजा है।" उन्होंने पुलिस और न्यायपालिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों को सख्त सजा दिलाना एक मजबूत सामाजिक उदाहरण पेश करने के लिए जरूरी है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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