गुजरात: स्कूलों में मनमानी पर लगेगी लगाम, नए कानून में भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान
गुजरात में अब बिना इजाजत स्कूल चलाना, अवैध रूप से शिक्षकों की भर्ती करना या बीच सत्र में स्कूल बंद कर देना काफी महंगा पड़ेगा। गुरुवार को राज्य विधानसभा ने 'गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा…
गुजरात में अब बिना इजाजत स्कूल चलाना, अवैध रूप से शिक्षकों की भर्ती करना या बीच सत्र में स्कूल बंद कर देना काफी महंगा पड़ेगा। गुरुवार को राज्य विधानसभा ने 'गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1972' में कई महत्वपूर्ण संशोधन पारित किए हैं, जिनका मकसद स्कूलों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों में जुर्माने की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया है और जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।
इन संशोधनों का एक अहम पहलू विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CWSN) की शिक्षा को लेकर है। अब राज्य के स्कूलों में विशेष शिक्षकों (Special Educators) की नियुक्ति के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य दिव्यांग छात्रों को प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से बेहतर शैक्षिक अवसर और मार्गदर्शन मुहैया कराना है।
नियम तोड़ने पर सख्त सजा
नए कानून के तहत, अगर कोई भी स्कूल गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में पंजीकरण कराए बिना संचालित होता पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। पहले इसके लिए एक से दो लाख रुपये का जुर्माना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 लाख से 15 लाख रुपये तक का जुर्माना या एक से दो साल तक की जेल, या दोनों का प्रावधान किया गया है।
इसी तरह, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रिंसिपल या शिक्षक की अवैध नियुक्ति करने पर प्रबंधन पर लगने वाले जुर्माने को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना है।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं
कई बार स्कूलों के अचानक बंद हो जाने से छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। इसे रोकने के लिए भी नियमों को सख्त किया गया है। अब अगर कोई पंजीकृत स्कूल शैक्षणिक सत्र के दौरान अनिवार्य छह महीने का नोटिस दिए बिना बंद होता है, तो उस पर 20 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पहले यह राशि महज 1,000 रुपये थी। सरकार ने साफ किया है कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि प्रबंधन के फैसलों का खामियाजा छात्रों को न भुगतना पड़े।
भर्ती और प्रबंधन के नए नियम
संशोधनों में सरकारी सहायता प्राप्त (ग्रांटेड) और पूरी तरह से निजी (नॉन-ग्रांटेड) स्कूलों के लिए कानूनी वर्गीकरण को भी स्पष्ट किया गया है। सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक, प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ की योग्यता व चयन प्रक्रिया राज्य सरकार तय करेगी। वहीं, निजी स्कूलों के लिए सरकार सिर्फ स्टाफ की योग्यता निर्धारित करेगी, और इन भर्तियों पर राज्य की आरक्षण नीति भी लागू होगी। इसके अलावा, शिक्षा अधिनियम की धारा 3(2) के तहत सदस्यों के चयन और अभिभावक संघों के प्रतिनिधित्व से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं ताकि सभी तरह के स्कूलों को इसमें शामिल किया जा सके।
इनपुट: IANS



