तमिलनाडु: दो मौतों के बाद आदमखोर बाघ की तलाश तेज़, गुडालुर में दुकानें बंद
तमिलनाडु के गुडालुर में एक बाघ के हमले में दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और डर का माहौल है। इस घटना के विरोध में और आदमखोर बाघ को जल्द पकड़ने की मांग को लेकर व्यापारियों और…
तमिलनाडु के गुडालुर में एक बाघ के हमले में दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और डर का माहौल है। इस घटना के विरोध में और आदमखोर बाघ को जल्द पकड़ने की मांग को लेकर व्यापारियों और स्थानीय संगठनों ने 48 घंटे के बंद का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को लगभग 10,000 दुकानें बंद रहीं और यह बंद शुक्रवार को भी जारी रहेगा।
बाघ के हमले में मारे गए व्यक्तियों की पहचान बालकृष्णन और रविचंद्रन के रूप में हुई है। इन अलग-अलग हमलों के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है, जिसके चलते व्यापारी, राजनीतिक दल और स्थानीय संगठन एकजुट होकर बाघ को पकड़ने की मांग कर रहे हैं।
बाघ को पकड़ने के लिए बड़ा अभियान
लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए वन विभाग ने बाघ को पकड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। तमिलनाडु के मुख्य वन्यजीव वार्डन राकेश कुमार डोगरा के निर्देश पर एक बड़ा तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। गुडालुर के जिला वन अधिकारी देवराज के नेतृत्व में 100 से अधिक वन कर्मियों की एक टीम इस काम में जुटी है।
इस ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें तीन थर्मल-इमेजिंग ड्रोन, 130 स्वचालित कैमरे और 12 पिंजरे शामिल हैं। कोयंबटूर और अन्य डिवीजनों से भी अतिरिक्त वन कर्मियों को बुलाया गया है। हालांकि, लगातार बारिश, धुंध और कम दृश्यता के कारण निगरानी में बाधा आ रही है, जिससे बाघ अब तक पकड़ से बाहर है। अधिकारियों ने 130 कैमरों की फुटेज की जांच की, लेकिन उनमें जानवर की कोई हलचल दर्ज नहीं हुई।
मुआवज़े और सरकारी नौकरी की मांग
इससे पहले, कोटागिरी में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक भी आयोजित की गई थी। सीपीआई (एम) के तालुक सचिव मणिकंदन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें जंगली जानवरों के हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए मुआवज़ा राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने की मांग शामिल है। साथ ही, प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है।
सुरक्षा के मद्देनज़र, वन विभाग ने उन इलाकों में आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है, जहां बाघ की मौजूदगी की आशंका है। टीमें वृक्षारोपण क्षेत्रों और जंगलों में चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं।
इनपुट: IANS



