गांवों में उद्यमिता की लहर: सरकारी योजना से 4.32 लाख छोटे कारोबारों को मिली नई उड़ान, 86% लाभार्थी वंचित वर्गों से
भारत के ग्रामीण इलाकों में छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना ने लाखों लोगों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव लाया है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 'स्टार्ट-अप विलेज…
भारत के ग्रामीण इलाकों में छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना ने लाखों लोगों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव लाया है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 'स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम' (SVEP) के तहत जून 2024 तक 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सफलतापूर्वक सहायता दी गई है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसके 86 प्रतिशत लाभार्थी समाज के वंचित वर्गों से हैं, जिनमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना न केवल उद्यमियों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हुई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इस योजना का सबसे अधिक लाभ उठाया है, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमों को सहारा मिला है।
कैसे काम करती है यह योजना?
यह कार्यक्रम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के जरिए लागू किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य खेती से अलग, दूसरे तरह के ग्रामीण कारोबारों को बढ़ावा देना है। इसके तहत उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय मदद, मेंटरिंग और समुदाय आधारित संस्थागत सहयोग मुहैया कराया जाता है। इस योजना को स्वयं सहायता समूहों (SHG), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी अन्य सरकारी पहलों के साथ जोड़कर इसका प्रभाव और भी बढ़ाया गया है।
वित्तीय सहायता और निवेश
इस योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। फरवरी 2024 तक इस कार्यक्रम के लिए कुल 942.09 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई। यह राशि योजना की शुरुआती अवधि (2016 से जनवरी 2018) में जारी 112.39 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है। कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ब्लॉक के लिए 6.50 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि हर एक उद्यम पर औसतन 27,083 रुपये का निवेश किया जाता है।
जमीनी स्तर पर मदद और मार्गदर्शन
उद्यमियों की मदद के लिए 'कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन' (CRP-EP) की एक टीम तैयार की जाती है। इन सदस्यों का चुनाव स्थानीय निवासियों में से होता है, जिन्हें व्यवसाय और गणित का बुनियादी ज्ञान हो। सरकार के अनुसार, इनमें से कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से होते हैं और इस टीम में महिलाओं की न्यूनतम हिस्सेदारी 60 प्रतिशत रखी गई है। प्रत्येक CRP-EP लगभग 50 उद्यमों को मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और कर्ज दिलाने में सहायता करता है। सरकार का मानना है कि इस योजना ने साबित कर दिया है कि सामुदायिक सहयोग से ग्रामीण उद्यमिता समावेशी आर्थिक विकास का एक शक्तिशाली माध्यम बन सकती है।
इनपुट: IANS



