ठाकरे बंधुओं ने मुंबई में एक साथ संभाला मोर्चा, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
महाराष्ट्र की राजनीति में दुर्लभ एकजुटता दिखाते हुए ठाकरे बंधु, राज और उद्धव, रविवार को मुंबई की सड़कों पर एक साथ उतरे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने एक विशाल 'गर्जना मोर्चा' का नेतृत्व…
महाराष्ट्र की राजनीति में दुर्लभ एकजुटता दिखाते हुए ठाकरे बंधु, राज और उद्धव, रविवार को मुंबई की सड़कों पर एक साथ उतरे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने एक विशाल 'गर्जना मोर्चा' का नेतृत्व किया, जिसमें मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीधे तौर पर भारत के चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनौती दी गई।
इस विरोध प्रदर्शन में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के प्रमुख सहयोगी दल, जैसे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और कांग्रेस पार्टी भी शामिल हुए, जिससे मोर्चे को और मजबूती मिली। मेट्रो सिनेमा से लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय तक निकाले गए इस मार्च में कम्युनिस्ट पार्टियों, किसानों और वर्कर्स पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। हजारों प्रदर्शनकारियों ने पार्टी के झंडों की जगह तिरंगा थाम रखा था और उनकी मुख्य मांगें थीं- जवाबदेही तय हो, विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया रद्द हो और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें।
मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि लोकसभा चुनाव के महज छह महीने के भीतर महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में 40 से 60 लाख की आश्चर्यजनक बढ़ोतरी कैसे हो गई। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया से जानबूझकर किया गया समझौता बताया। राज ठाकरे ने कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पूरे राज्य में पसरा सन्नाटा जनता के मोहभंग और सदमे को दर्शाता है, जबकि एक वास्तविक लोकतांत्रिक जीत का जश्न सड़कों पर दिखता है।
उन्होंने अपनी दो प्रमुख मांगें रखते हुए कहा, "देश में एसआईआर अवैध है। मेरी केवल दो मांगें हैं। पहला, महाराष्ट्र में आयोजित एसआईआर को खत्म किया जाना चाहिए। दूसरा, भविष्य के सभी चुनाव मतपत्र पर आयोजित किए जाने चाहिए। इससे पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, दूध का दूध, पानी का पानी।"
भविष्य की रणनीति और एकजुटता का आह्वान
राज ठाकरे ने याद दिलाया कि उन्होंने 2017-18 में ही सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं से मिलकर ईवीएम की कमजोरियों और मतदाता सूची की गड़बड़ियों को लेकर आगाह किया था। उन्होंने फिर दोहराया कि चुनावों का एकजुट बहिष्कार ही पारदर्शिता लाने का एकमात्र निश्चित तरीका है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दिल्ली जाकर इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने का आग्रह किया।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में केंद्र की भाजपा सरकार पर संस्थानों पर नियंत्रण करने और राजनीतिक दलों में फूट डालने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की शक्तियों के केंद्रीकरण की कड़ी आलोचना की और उन्हें पद से हटाने की मांग की। उद्धव ठाकरे ने सीईसी को उनके कार्यकाल के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुरक्षा पर भी सवाल उठाए।
इनपुट: IANS



