संसद का मानसून सत्र: सरकार ने सुचारू कार्यवाही के लिए बुलाई सर्वदलीय बैठक, सहयोग की अपील
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है और यह 13 अगस्त तक चलेगा। इस महत्वपूर्ण सत्र से ठीक पहले, केंद्र सरकार ने रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है ताकि दोनों सदनों की कार्यवाही को सुचारू रूप…
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है और यह 13 अगस्त तक चलेगा। इस महत्वपूर्ण सत्र से ठीक पहले, केंद्र सरकार ने रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है ताकि दोनों सदनों की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा जा सके। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की जाएगी।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सत्र की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 तक संसद का सत्र बुलाने को मंजूरी दी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सत्र राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस और चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करेगा। इस चार सप्ताह के सत्र में कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं।
बदला हुआ सियासी समीकरण
इस बार संसद में राजनीतिक समीकरणों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर कार्यवाही पर पड़ सकता है। सत्तारूढ़ एनडीए की संख्या बढ़ने की संभावना है, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन की ताकत कुछ कम हो सकती है। इसके पीछे तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद, डीएमके और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी, और उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों का दल-बदल जैसे कारक शामिल हैं।
इसी संदर्भ में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दो महत्वपूर्ण विलयों पर फैसला लेना है। इनमें तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का एनसीपीआई में और उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों का एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय का मामला शामिल है। वहीं, तमिलनाडु में बदलते गठबंधन के चलते डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष से अपने सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।
सत्र में पेश होने वाले महत्वपूर्ण विधेयक
मानसून सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की उम्मीद है। इनमें महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके अलावा, सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी पेश कर सकती है, जिसके तहत गंभीर अपराधों में 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने वाले मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
अन्य संभावित विधेयकों में 'वन नेशन, वन इलेक्शन', एफसीआरए संशोधन विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, और एंटी-डोपिंग विधेयक शामिल हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश को बदलने वाला विधेयक और कॉरपोरेट कानून से जुड़े बिल भी पेश किए जा सकते हैं।
इनपुट: IANS



