गुरूवार, 2 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत की गगन प्रणाली: हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने वाली स्वदेशी तकनीक क्या है और कैसे काम करती है?

भारत की अपनी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली 'गगन' (GAGAN) देश में हवाई यात्रा को पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और कुशल बना रही है। सरकार के एक हालिया बयान के अनुसार, यह तकनीक न केवल देश के सैटेलाइट न

भारत की गगन प्रणाली: हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने वाली स्वदेशी तकनीक क्या है और कैसे काम करती है?
(फोटो: IANS)

भारत की अपनी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली 'गगन' (GAGAN) देश में हवाई यात्रा को पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और कुशल बना रही है। सरकार के एक हालिया बयान के अनुसार, यह तकनीक न केवल देश के सैटेलाइट नेविगेशन इकोसिस्टम को मज़बूत कर रही है, बल्कि विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता भी कम कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रणाली अब वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद नेविगेशन सिस्टम के तौर पर स्थापित हो चुकी है।

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साल 2015 से पूरी तरह काम कर रही गगन प्रणाली की बदौलत भारत, अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी सैटेलाइट-आधारित ऑग्मेंटेशन सिस्टम (SBAS) है।

गगन प्रणाली की ज़रूरत क्यों पड़ी?

विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए उनकी स्थिति की एकदम सटीक जानकारी होना बेहद ज़रूरी है। इसमें थोड़ी-सी भी चूक उड़ान सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा बन सकती है। हालाँकि, इसके लिए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का इस्तेमाल होता है, लेकिन उसके सिग्नल कई बार वायुमंडलीय या तकनीकी कारणों से प्रभावित हो सकते हैं। भारत के तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ार को देखते हुए एक ऐसी ज़्यादा सटीक और विश्वसनीय प्रणाली की ज़रूरत थी, जिसके बाद 'गगन' का विकास किया गया।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

गगन यानी 'जीपीएस एडेड जीईओ ऑगमेंटेड नेविगेशन' को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर विकसित किया है। यह ज़मीन पर मौजूद स्टेशनों, संचार नेटवर्क और जियोस्टेशनरी सैटेलाइट के ज़रिए काम करती है। यह सिस्टम लगातार GPS सिग्नलों की निगरानी करता है, उनमें मौजूद किसी भी त्रुटि का पता लगाकर उसे ठीक करता है, और फिर संशोधित व सटीक नेविगेशन जानकारी सीधे विमानों तक पहुँचाता है। इससे न सिर्फ GPS सिग्नल की सटीकता बढ़ती है, बल्कि उड़ानों का संचालन ज़्यादा सुरक्षित और बेहतर हो जाता है।

हाल की बड़ी उपलब्धि और भविष्य

सरकार ने बताया कि जून 2026 में गगन ने एक अहम पड़ाव पार किया, जब नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पहली बार किसी व्यावसायिक जेट पर इसकी मदद से सैटेलाइट-आधारित लैंडिंग सिस्टम अप्रोच का सफल परीक्षण किया। 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्सटेलेशन' (NavIC) के साथ मिलकर गगन भारत की आत्मनिर्भरता को मज़बूत कर रहा है। विमानन के अलावा परिवहन, आपदा प्रबंधन और सर्वेक्षण जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी इसके उपयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं, जो इसे भारत के तकनीकी भविष्य का एक प्रमुख आधार बनाता है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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