सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में G20: दुनिया की समस्याओं पर एक राय, समाधान पर दिखी अलग-अलग राह

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (G20) के नेताओं ने एक सुर में माना कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमज़ोर पड़ रही है। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट…

संयुक्त राष्ट्र महासभा में G20: दुनिया की समस्याओं पर एक राय, समाधान पर दिखी अलग-अलग राह
(फोटो: IANS)

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (G20) के नेताओं ने एक सुर में माना कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमज़ोर पड़ रही है। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के तरीकों पर इन देशों के बीच गहरे मतभेद साफ नज़र आए। पांच दिनों तक चली बहस में युद्ध, आर्थिक दबाव, बाधित सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में घटते विश्वास जैसी वैश्विक समस्याओं पर चर्चा हुई, लेकिन समाधान को लेकर दुनिया बँटी हुई दिखी।

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बहस के दौरान अमेरिका ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का बचाव किया, तो चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था को बचाने की वकालत की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र पर "बेहद वामपंथी एजेंडे" को थोपने का आरोप लगाया। वहीं, चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने कहा, "दुनिया शांति चाहती है, युद्ध नहीं।" उन्होंने संरक्षणवाद और सप्लाई चेन तोड़ने के खिलाफ भी चेतावनी दी।

पश्चिमी देश बनाम उभरती शक्तियाँ

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ग्लोबल साउथ और ईस्ट अब नए शक्ति केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों पर अपने पुराने दबदबे को बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत की, लेकिन साथ ही वैश्विक संस्थाओं में समय के साथ सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सवाल किया कि क्या दुनिया "जंगल के कानून" की ओर लौटना चाहती है।

भारत ने उन संघर्षों के आर्थिक परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया, जिनसे उसका सीधा वास्ता नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि खाना, ईंधन और खाद जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई में रुकावट की कीमत उन देशों को भी चुकानी पड़ रही है, जिन्होंने ये युद्ध शुरू नहीं किए। उन्होंने कहा, "जो देश सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, अक्सर फैसले लेने में उनकी आवाज सबसे कम होती है।"

संस्थाओं में सुधार और शांति का रास्ता

कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि सुरक्षा परिषद में फैसले न हो पाने से यूएन की साख को नुकसान पहुँचा है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने तो संयुक्त राष्ट्र को एक "बेकार संगठन" तक कह दिया।

इस बीच, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और इंडोनेशिया जैसे देशों ने खुद को बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने वाली ताकतों के रूप में पेश किया। इन देशों का मानना था कि वे बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच संवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका ने वैश्विक आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाया, जबकि जापान ने इंडो-पैसिफिक में मजबूत सप्लाई चेन और परमाणु निरस्त्रीकरण पर जोर दिया। कुल मिलाकर, G20 देश समस्याओं को लेकर तो सहमत दिखे, लेकिन उनके समाधान का रास्ता एक-दूसरे से बिलकुल अलग था।

इनपुट: IANS

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