भारत-अमेरिका संबंध: विक्रम मिस्री की अमेरिकी नेताओं से कई अहम बैठकें, प्रतिबंध कानून पर हुई चर्चा
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने न्यूयॉर्क में रविवार को अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के संबंधों के भविष्य और रूस-ईरान प्रतिबंध कानून (SRIA) जैसे…
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने न्यूयॉर्क में रविवार को अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के संबंधों के भविष्य और रूस-ईरान प्रतिबंध कानून (SRIA) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट कर रहे थे।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत हुई। इसमें आपसी चिंता के अंतरराष्ट्रीय मुद्दे, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला और नेविगेशन की स्वतंत्रता जैसे विषय शामिल थे।
तकनीक और व्यापार पर केंद्रित वार्ता
अपनी यात्रा के दौरान विदेश सचिव मिस्री ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई और बैठकें भी कीं। उन्होंने अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्ष महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। विदेश मंत्रालय ने एक पोस्ट में बताया कि इसमें 'पैक्स सिलिका' पहल और सेमीकंडक्टर व महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के माध्यम से आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
इसके अलावा, मिस्री ने अमेरिका की राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हूकर से भी मुलाकात की। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, नागरिक परमाणु सहयोग, ट्रस्ट पहल और हिंद महासागर से जुड़े सहयोग पर चर्चा हुई। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और अन्य अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे।
जयशंकर ने भी उठाया था SRIA का मुद्दा
इससे पहले, बुधवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के दौरान रूस और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर लगने वाले संभावित प्रतिबंधों के मुद्दे पर चर्चा की थी। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था कि उन्होंने SRIA कानून को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। उनकी बातचीत में खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति भी शामिल थी।
विदेश विभाग के अनुसार, जयशंकर और रुबियो की वार्ता में ऊर्जा सुरक्षा, मध्य पूर्व के घटनाक्रम और अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा हुई। हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन देशों या आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लग सकते हैं।
इनपुट: IANS



