भारतीय फिनटेक सेक्टर में बदला माहौल, अब तेज ग्रोथ से ज्यादा ग्राहकों का भरोसा जीतना प्राथमिकता
भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आक्रामक विस्तार और सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अब कंपनियां ग्राहकों का भरोसा जीतने, बेहतर गवर्नेंस और अपने
भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आक्रामक विस्तार और सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अब कंपनियां ग्राहकों का भरोसा जीतने, बेहतर गवर्नेंस और अपने ऑपरेशन को मजबूत बनाने पर जोर दे रही हैं। फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (FACE) और ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक संयुक्त रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, फिनटेक जगत में अब साख और भरोसे को सबसे ऊपर रखा जा रहा है।
सर्वे में शामिल करीब 59 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि उनकी साख और ब्रांड से जुड़े जोखिम सबसे गंभीर चिंता का विषय हैं। रिपोर्ट बताती है कि ग्राहकों का भरोसा डेटा लीक, साइबर सुरक्षा में चूक और अनधिकृत संस्थाओं की गलत हरकतों जैसी घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित होता है। इसलिए, कंपनियों की प्रतिष्ठा अब बेहतर गवर्नेंस, नियमों के पालन, शानदार ग्राहक अनुभव और डेटा सुरक्षा का मिला-जुला परिणाम बन गई है।
सबसे बड़े जोखिम क्या हैं?
रिपोर्ट में जोखिमों को 1 से 10 के पैमाने पर गंभीरता के आधार पर रैंक किया गया है। प्रतिष्ठा से जुड़े जोखिम के बाद, 51 प्रतिशत कंपनियों ने इंटरऑपरेबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े जोखिम को दूसरी सबसे बड़ी चुनौती बताया। इसका मतलब है कि कंपनियां UPI और आधार जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं और वे भारत के डिजिटल इकोसिस्टम के लगातार मजबूत बने रहने पर भरोसा करती हैं।
अन्य जोखिमों में बाजार प्रतिस्पर्धा और कंडक्ट रिस्क (आचरण संबंधी जोखिम) तीसरे स्थान पर रहे, जिनका औसत गंभीरता स्कोर 6.9 था। इसके बाद डेटा एक्सेस, प्राइवेसी और सुरक्षा (स्कोर 6.6) और साइबर सुरक्षा व बिजनेस कंटिन्यूटी (स्कोर 6.5) का स्थान रहा।
संतुलन और स्थायित्व पर जोर
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर विवेक अय्यर ने इस बदलाव पर जोर देते हुए कहा, "मुनाफे, विकास और भरोसे के बीच संतुलन बनाना फिनटेक इकोसिस्टम के लिए मुख्य कारकों में से एक बन गया है, और फिनटेक बैरोमीटर रिपोर्ट इसी बात पर जोर देती है।" उन्होंने कहा कि पेमेंट, निवेश, क्रेडिट और बीमा जैसे क्षेत्रों में फिनटेक इकोसिस्टम के पास एक दशक पहले की तुलना में अधिक मजबूत आय और गवर्नेंस मॉडल हैं, जो उन्हें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और फंडिंग से जुड़े जोखिमों को फिलहाल संभालने योग्य माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, रेगुलेटरी हस्तक्षेप, धोखाधड़ी पर बेहतर नियंत्रण और निवेशकों के लगातार भरोसे से इसमें मदद मिली है। यह रिपोर्ट लेंडिंग, पेमेंट, रेगटेक और कलेक्शन-टेक जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली 39 फिनटेक कंपनियों के सर्वे पर आधारित है।
इनपुट: IANS



