रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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PoK: पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल, लापता लोगों के परिवार मांग रहे इंसाफ

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे कई परिवार महीनों से न्याय के लिए भटक रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों पर मानवाधिकार…

PoK: पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल, लापता लोगों के परिवार मांग रहे इंसाफ
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे कई परिवार महीनों से न्याय के लिए भटक रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों पर मानवाधिकार उल्लंघन, अवैध हिरासत और गैर-न्यायिक हत्याओं जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, ये मामले उन विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र में बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुए थे।

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यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे उस इलाके की संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। जमीनी कार्यकर्ताओं के संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) ने मौजूदा व्यवस्था को स्थानीय निवासियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने में विफल बताते हुए 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच चुनावों के बहिष्कार का आह्वान किया था।

हिंसक कार्रवाई और मानवाधिकारों का हनन

'द इंडिपेंडेंट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस आह्वान के बाद पाकिस्तानी सरकार ने जेएएसी पर कड़े आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया और उसके कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। आंदोलन को दबाने के लिए चलाए गए सुरक्षा अभियान के दौरान मनमानी हिरासत और गैर-न्यायिक हत्याओं के आरोप भी लगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेएएसी ने 5 जून के बाद से 100 से ज्यादा लोगों की मौत की जानकारी सार्वजनिक की है, जबकि स्थानीय निवासियों का मानना है कि मरने वालों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।

न्याय के लिए भटकते परिवार

इन घटनाओं के बीच कई परिवारों की दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं। 26 वर्षीय फहद बरकत का मामला इसका एक उदाहरण है, जो 7 जून को रावलकोट के एक सैन्य अस्पताल में रक्तदान करने गए और फिर कभी घर नहीं लौटे। उनकी बहन दो महीने से अधिक समय तक यही मानती रहीं कि वह पुलिस हिरासत में हैं। परिवार को बहुत बाद में पता चला कि अस्पताल के गेट पर ही उनकी गर्दन में गोली मार दी गई थी।

इसी तरह, शौकत नवाज मीर के परिवार को 30 जून को उनकी गिरफ्तारी के तीन महीने बाद भी उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। एक अन्य मामले में, जाबिर मुमताज को 5 सितंबर को कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों ने मार डाला, जबकि वह दो हफ्ते से हिरासत में थे।

शव सौंपने की शर्तों पर विवाद

रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने फहद बरकत और जाबिर मुमताज के शवों को सौंपने के लिए उनके परिवारों पर एक बयान पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला, जिसमें उन्हें 'आतंकवादी' बताया गया था। मुमताज के परिवार ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने कथित तौर पर खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया।

इन मामलों को लेकर ब्रिटेन में पंजीकृत संगठन 'जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी' (जेकेएचआरओ) ने अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की है। संगठन ने 47 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट में हिरासत, मौतों और लापता होने की घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करने की मांग की है, ताकि सच्चाई का पता चल सके और जिम्मेदारी तय हो।

इनपुट: IANS

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