शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जलवायु परिवर्तन का असर: पश्चिमी यूरोप में बढ़ रही है भीषण गर्मी और विनाशकारी आग का खतरा

पश्चिमी यूरोप दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तुलना में तेज़ी से गर्म हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में भीषण गर्मी (हीटवेव) और विनाशकारी आग की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एक…

जलवायु परिवर्तन का असर: पश्चिमी यूरोप में बढ़ रही है भीषण गर्मी और विनाशकारी आग का खतरा
(फोटो: IANS)

पश्चिमी यूरोप दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तुलना में तेज़ी से गर्म हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में भीषण गर्मी (हीटवेव) और विनाशकारी आग की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एक प्रमुख जलवायु विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि भूमध्य सागर के आसपास के देश विशेष रूप से इस बदलते जलवायु के प्रति संवेदनशील हैं।

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स्पेन के स्टेट मेटियोरोलॉजिकल एजेंसी (AEMET) के प्रवक्ता रूबेन डेल कैंपो ने कहा, "कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि पश्चिमी यूरोप, जिसमें (यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल) शामिल हैं, यहाँ दुनिया के कई दूसरे हिस्सों की तुलना में तेज़ी से गर्मी बढ़ रही है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस क्षेत्र पर हीटवेव का खतरा भी ज़्यादा है।

स्पेन में गर्मी और सूखे के रिकॉर्ड

स्पेन में इस साल गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। देश ने जुलाई के अंत में अपनी चौथी हीटवेव का सामना किया, जिसमें तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान था। AEMET के आंकड़ों के अनुसार, 1961 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह जून स्पेन में दूसरा सबसे गर्म और तीसरा सबसे सूखा महीना था। डेल कैंपो ने बताया कि मई के अंत तक ही देश के कुछ हिस्सों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

जंगल की आग का बढ़ता प्रकोप

बढ़ते तापमान का सीधा असर जंगल की आग पर दिख रहा है। स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में इस गर्मी में अब तक लगभग 2 लाख लोगों को अपने घर खाली करने पड़े हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मैड्रिड के पास, मध्य स्पेन और दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस, खासकर बोर्डो के आसपास, बड़े पैमाने पर आग लगी है। स्पेन के पारिस्थितिक संक्रमण मंत्रालय के अनुसार, जुलाई के अंत तक देश में जंगल की आग ने लगभग 1 लाख, 80 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन को अपनी चपेट में ले लिया था। यह 2025 में इसी अवधि के दौरान दर्ज 29,817 हेक्टेयर से लगभग छह गुना ज़्यादा है।

क्या जलवायु परिवर्तन है वजह?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है। डेल कैंपो ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के साथ इसका एक साफ़ लिंक है। औसत तापमान में बढ़ोतरी से हमेशा बहुत ज़्यादा गर्मी के मामले बढ़ते हैं, और हम ठीक यही देख रहे हैं।" उन्होंने यह भी समझाया कि गर्मी जल्दी शुरू होने और बारिश की कमी से जंगल तेज़ी से सूख जाते हैं, जिससे आग लगने पर उसे काबू करना मुश्किल हो जाता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी जुलाई में कहा था कि 1976 की ऐतिहासिक हीटवेव के बाद से पूरे यूरोप में तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है।

इनपुट: IANS

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