कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप, AIADMK ने की हस्तक्षेप की मांग
तमिलनाडु में कावेरी जल बंटवारे का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया है कि वह 22 जुलाई को होने वाली…
तमिलनाडु में कावेरी जल बंटवारे का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया है कि वह 22 जुलाई को होने वाली कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की बैठक में राज्य के हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सत्ताधारी दल पर किसानों के हितों और राज्य के जल अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
पलानीस्वामी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका और 20 से अधिक जिलों के लोगों की पीने के पानी की ज़रूरतें पूरी तरह से इसी नदी पर निर्भर हैं। उन्होंने कर्नाटक पर आरोप लगाया कि वह सुप्रीम कोर्ट के बार-बार के फैसलों के बावजूद तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा है और राज्य को केवल बाढ़ का अतिरिक्त पानी निकालने वाले चैनल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
पानी की कमी और लंबित आवंटन
AIADMK नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए सालाना 177.25 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC ft) पानी छोड़ने का निर्देश है। उन्होंने कहा कि जून महीने में देय 9.19 TMC फीट पानी में से केवल 2.91 TMC फीट ही छोड़ा गया। वहीं, जुलाई में लगभग 31.24 TMC फीट पानी मिलना था, लेकिन जून की कमी और जुलाई का आवंटन, दोनों ही अब तक लंबित हैं।
प्राधिकरण के निर्देशों की अनदेखी
पलानीस्वामी ने याद दिलाया कि CWMA और कावेरी जल विनियमन समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही हुआ था, ताकि कर्नाटक हर महीने तय कार्यक्रम के अनुसार पानी छोड़े। उन्होंने दावा किया कि पिछले महीने प्राधिकरण ने कर्नाटक को मासिक आवंटन जारी करने का निर्देश दिया था, लेकिन न तो प्राधिकरण ने अपने आदेश का पालन सुनिश्चित कराया और न ही तमिलनाडु सरकार ने इसे लागू करवाने के लिए कोई दबाव बनाया।
उन्होंने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस हालिया बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि कर्नाटक के जलाशय भरने के बाद ही पानी छोड़ा जाएगा। पलानीस्वामी ने इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अंतर-राज्यीय जल-बंटवारे के स्थापित दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया।
किसानों के साथ विश्वासघात का आरोप
पलानीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पानी के लिए कर्नाटक पर दबाव न डालना डेल्टा क्षेत्र के किसानों के साथ विश्वासघात है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर और देरी हुई तो इससे कुरुवाई की खेती और हजारों किसान परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सहकारी कृषि ऋण माफी के अपने चुनावी वादे को भी कमजोर कर दिया है।
इनपुट: IANS



