बंगाल की कंपनी पर बैंक फ्रॉड का आरोप: ED ने 139 खाते फ्रीज किए, महंगी गाड़ियां भी जब्त
पश्चिम बंगाल की एक कॉर्पोरेट कंपनी 'गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (GPIL) के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
पश्चिम बंगाल की एक कॉर्पोरेट कंपनी 'गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (GPIL) के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी ने कंपनी से जुड़े 139 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में की गई है, जिसकी जांच CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी।
ईडी के अधिकारियों ने इस साल 5 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य ओडिशा में कंपनी और उसके प्रबंधन से जुड़े नौ ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिवाइस और रिकॉर्ड बरामद हुए, जिसके बाद बैंक खातों को फ्रीज करने का फैसला लिया गया।
क्या हैं कंपनी पर आरोप?
यह मामला बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, GPIL ने कई बैंकों से बड़े पैमाने पर वर्किंग कैपिटल की सुविधा ली थी। इस कंसोर्टियम का नेतृत्व केनरा बैंक कर रहा था। ईडी ने बताया कि कंसोर्टियम का कुल एक्सपोजर लगभग 3,590 करोड़ रुपये का था, जिसमें अकेले केनरा बैंक का करीब 1,174 करोड़ रुपये का एक्सपोजर शामिल था।
आरोप है कि कंपनी ने अपनी कर्ज लेने की क्षमता को गलत तरीके से बढ़ाया। ईडी के अनुसार, GPIL ने अपने वित्तीय बयानों में दिखाए गए स्टॉक की तुलना में बैंकों को कहीं ज़्यादा स्टॉक बताकर ऐसा किया। इसके अलावा, करीब 280 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट और EPC स्टॉक को भी योग्य स्टॉक में शामिल कर लिया गया।
बरामदगी और आगे की जांच
छापेमारी के दौरान ईडी ने कंपनी और उससे जुड़े लोगों के नाम पर मौजूद कई म्यूचुअल फंड और शेयरों को भी फ्रीज कर दिया है। एजेंसी ने तीन महंगी गाड़ियां भी जब्त की हैं, जिनमें दो मर्सिडीज और एक बीएमडब्ल्यू शामिल हैं। ईडी के एक बयान के अनुसार, जब्त की गई सामग्री और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी द्वारा बताए गए बकाया रकम में करीब 1,115.15 करोड़ रुपये का भारी अंतर था, जिससे पता चलता है कि संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर कर्ज की सीमा बढ़ाई गई।
इनपुट: IANS



