पंजाब में औद्योगिक प्लॉट आवंटन घोटाला: ED ने कई शहरों में की छापेमारी, 4 करोड़ रुपये फ्रीज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब में औद्योगिक प्लॉटों के अवैध आवंटन से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने चंडीगढ़ समेत पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में कई…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब में औद्योगिक प्लॉटों के अवैध आवंटन से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने चंडीगढ़ समेत पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और 12.15 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं।
यह पूरा मामला पंजाब लघु उद्योग और निर्यात निगम (PSIEC) के अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर रिश्वत लेकर अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और सहयोगियों को औद्योगिक प्लॉट आवंटित करने से जुड़ा है। ED ने यह जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी।
कैसे हुआ घोटाला?
जांच में यह बात सामने आई है कि ये औद्योगिक प्लॉट ऐसे लोगों और फर्जी फर्मों को आवंटित किए गए, जिन्हें उद्योगों की कोई जानकारी नहीं थी। आवेदकों ने नकली पतों का इस्तेमाल किया और अधिकारियों से मिलीभगत के चलते उन्हें आसानी से प्लॉट मिल गए। ED के अनुसार, इन अवैध आवंटनों के बदले अधिकारियों को नकद और अन्य जटिल वित्तीय तरीकों से मोटी रिश्वत दी गई।
कई मामलों में, प्लॉट आवंटित होने के बाद भी कब्जा देने में वर्षों की देरी की गई। इस देरी की अवधि को 'जीरो पीरियड' मानकर आवंटियों से कोई ब्याज नहीं वसूला गया, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला। बाद में इन प्लॉट्स को मौजूदा बाजार दरों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया। जांच में यह भी पता चला कि उद्योग लगाने के लिए दिए गए इन प्लॉट्स को अवैध रूप से बांटकर आवासीय और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान बड़ी बरामदगी
तलाशी अभियान के अलावा, ED ने PSIEC के कार्यालय में भी सर्वे किया। इस दौरान एजेंसी ने निगम के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। इन अधिकारियों में चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और पूर्व जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा शामिल हैं, जिनके खातों में मौजूद 4.01 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज की गई है।
इनपुट: IANS



