मनी लॉन्ड्रिंग: पोंजी स्कीम चलाने वाली 'ड्रीम मेकर्स ग्लोबल' पर ED का शिकंजा, कई राज्यों में छापेमारी
निवेश पर 150 दिनों में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर हजारों लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये ठगने वाली एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) कंपनी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार ए
निवेश पर 150 दिनों में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर हजारों लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये ठगने वाली एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) कंपनी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (DMGPL) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में तमिलनाडु और केरल के आठ ठिकानों पर छापेमारी की है।
यह तलाशी 30 जून को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई। ईडी की टीमों ने तमिलनाडु के कोयंबटूर और कृष्णागिरी जिलों के अलावा केरल के मलप्पुरम और त्रिशूर जिलों में कंपनी से जुड़े परिसरों पर दबिश दी।
कैसे काम करती थी पोंजी स्कीम
ईडी के मुताबिक, कंपनी और उसके प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी कथित तौर पर सॉफ्टवेयर से जुड़ी परियोजनाओं और पैकेजों में निवेश का अवसर दिखाकर आम जनता से पैसा जुटाते थे। निवेशकों को भारी रिटर्न और केवल 150 दिनों में उनका पैसा दोगुना करने का वादा करके लुभाया जाता था। शुरुआत में, लोगों का विश्वास जीतने और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए कुछ रिटर्न का भुगतान भी किया गया। हालांकि, बाद में कंपनी ने भुगतान करना बंद कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हजारों जमाकर्ताओं को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
जांच के केंद्र में कंपनी के प्रमुख अधिकारी
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इस योजना को चलाने में कंपनी के दिवंगत प्रबंध निदेशक एस. सतीश कुमार, निदेशक गुणवती और प्रबंधक मुगुंथन नायर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार, गुणवती और उनके पति सतीश कुमार मिलकर कंपनी का प्रबंधन करते थे और जनता से जमा राशि एकत्र करते थे। वहीं, मुगुंथन नायर प्रचार बैठकें आयोजित कर लोगों को सुनिश्चित मुनाफे के झूठे वादे करके निवेश के लिए उकसाते थे।
छापेमारी में क्या मिला
तलाशी अभियान के दौरान, अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डायरी, डिजिटल रिकॉर्ड और अपराध की आय से कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियों के विवरण जब्त किए हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि कमीशन और निवेश से प्राप्त बड़ी रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अचल संपत्ति, वाहन और अन्य निजी संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था।
यह जांच तमिलनाडु पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की गई है। ईडी ने कहा है कि आरोपियों और उनके सहयोगियों से जुड़े बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य वित्तीय साधनों की भी पहचान की गई है, जिनमें से कई को अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पहले ही फ्रीज कर दिया गया था। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



