छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: मुख्य बिचौलिए सतपाल छाबड़ा को ED ने किया गिरफ़्तार, करोड़ों की कमीशनखोरी का आरोप
छत्तीसगढ़ के ज़िला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड में हुए कथित घोटाले की जाँच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में मुख्य…
छत्तीसगढ़ के ज़िला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड में हुए कथित घोटाले की जाँच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में मुख्य संपर्ककर्ता और वित्तीय समन्वयक माने जा रहे सतपाल सिंह छाबड़ा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ़्तार कर लिया है। छाबड़ा पर एक सिंडिकेट के ज़रिए करोड़ों रुपए की अवैध कमीशन वसूलने का आरोप है।
गिरफ़्तारी के बाद छाबड़ा को मंगलवार को रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने उन्हें पाँच दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है। ईडी की यह जाँच छत्तीसगढ़ पुलिस और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा डीएमएफ फंड के दुरुपयोग को लेकर दर्ज की गई कई FIR पर आधारित है।
क्या है DMF घोटाला?
ज़िला खनिज फाउंडेशन (DMF) की स्थापना खनन गतिविधियों से प्रभावित समुदायों के विकास और लाभ के लिए की गई थी। ईडी के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य के ज़िलों को इस फंड के तहत लगभग 9,188.20 करोड़ रुपए मिले थे। आरोप है कि लोक सेवकों, बिचौलियों और विक्रेताओं के एक गिरोह ने इन पैसों का दुरुपयोग किया।
एजेंसी ने अपने एक बयान में बताया कि घोटाले के तहत आपूर्ति-आधारित कार्यों को प्राथमिकता दी गई, ताकि मनमाने दाम तय कर कमीशन कमाया जा सके। फंड का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के ज़रिए इस्तेमाल किया गया।
कैसे काम करता था सिंडिकेट?
ईडी की जाँच के अनुसार, एजेंट और बिचौलिए दर-अनुबंध धारक संस्थाओं को जारी किए गए खरीद आदेशों के मूल मूल्य का 25% से 50% तक कमीशन वसूलते थे। इस कमीशन को बाद में सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों में बाँटा जाता था, जो बदले में काम के आदेश और भुगतान जारी करवाने में मदद करते थे।
सतपाल छाबड़ा पर इस सिंडिकेट में केंद्रीय भूमिका निभाने का आरोप है। वह कथित तौर पर फ़ायदेमंद आपूर्ति कार्यों की पहचान करते, उन्हें चुनिंदा विक्रेताओं को आवंटित करते, वर्क ऑर्डर और भुगतान जारी करवाते और फिर सिंडिकेट में बाँटने के लिए कमीशन इकट्ठा करते थे।
छाबड़ा के ख़िलाफ़ क्या सबूत हैं?
एजेंसी ने बताया कि सितंबर 2023 में की गई तलाशी के दौरान घोटाले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद हुए थे। बैंकिंग लेनदेन और अन्य बयानों के विश्लेषण से पता चला कि छाबड़ा ने लगभग 31 करोड़ रुपए की अवैध कमीशन हासिल की थी। यह राशि, जिसे अपराध की आय माना गया है, उनके परिवार के सदस्यों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और उनके द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के खातों में पाई गई। इन्हीं सबूतों के आधार पर उन्हें पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया गया है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जाँच जारी है।
इनपुट: IANS



