रविवार, 5 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कांगो में इबोला का प्रकोप गंभीर, 1500 से ज़्यादा मामले, सैकड़ों की मौत

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) इबोला के एक गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है, जहां इस बीमारी के 1,528 पुष्ट मामलों की पुष्टि हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घातक वायरस के क

कांगो में इबोला का प्रकोप गंभीर, 1500 से ज़्यादा मामले, सैकड़ों की मौत
(फोटो: IANS)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) इबोला के एक गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है, जहां इस बीमारी के 1,528 पुष्ट मामलों की पुष्टि हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घातक वायरस के कारण देश में अब तक 492 लोगों की जान जा चुकी है, जो समुदाय में इसके लगातार फैलने का संकेत है।

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शनिवार को डीआरसी के जन स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 239 मरीज इस बीमारी से उबर चुके हैं, जबकि 628 संक्रमित मरीज अभी भी आइसोलेशन में या अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इसके अलावा, अधिकारियों ने 185 संदिग्ध मामलों की भी पहचान की है।

लगातार बढ़ रहे मामले और बड़ी चुनौतियाँ

रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि हर हफ्ते पुष्ट मामलों की संख्या बढ़ रही है। महामारी विज्ञान के 25वें और 26वें सप्ताह में स्थिति सबसे गंभीर रही, जब दोनों ही हफ्तों में 300 से ज़्यादा नए मामले दर्ज किए गए।

स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। इनमें पोस्टमार्टम के लिए सैंपल लेने का सामुदायिक विरोध, इलाज केंद्रों में क्षमता की कमी (विशेषकर पूर्वी प्रांत नॉर्थ किवु में), और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का ठीक से पता न लगा पाना (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) शामिल है। इसके अलावा, लैब जांच में देरी, मेडिकल सामान की कमी और कुछ प्रभावित इलाकों तक सीमित पहुंच जैसी समस्याएँ भी प्रतिक्रिया प्रयासों में बाधा डाल रही हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चिंता

अफ्रीका के लिए डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकूब जनाबी ने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि पूर्वी प्रांतों इटुरी और नॉर्थ किवु में संक्रमण फैल रहा है। उन्होंने कहा कि "मौजूदा प्रकोप अब तक का सबसे बड़ा बुंडिबुग्यो इबोला प्रकोप है।"

डीआरसी में डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ पियरे अकिलिमाली ने बताया कि यह प्रकोप असुरक्षा और हथियारबंद समूहों की गतिविधियों से प्रभावित इलाकों में फैल रहा है, जिससे मामलों का पता लगाना और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मुश्किल हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इटुरी के कुछ प्रभावित इलाके खनन क्षेत्र हैं, जहां लोगों की लगातार आवाजाही से वायरस फैलने का खतरा और बढ़ गया है।

इलाज और रोकथाम के प्रयास

इस प्रकोप का कारण बुंडिबुग्यो वायरस है, जिसके लिए अभी तक कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने गुरुवार को घोषणा की कि डीआरसी में इस वायरस के संभावित इलाज का मूल्यांकन करने के लिए एक क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया गया है, जिसमें मरीजों को शामिल किया जा रहा है।

पड़ोसी देश युगांडा में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जहां गुरुवार तक 20 पुष्ट मामले सामने आए हैं। युगांडा में डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ बेंजामिन सेंसासी के अनुसार, इनमें से 15 मामले बाहर से आए थे और बाकी पांच स्थानीय रूप से संक्रमित लोगों की पहचान क्वारंटाइन के दौरान हुई। दोनों देशों ने निगरानी जानकारी साझा करने और सीमा पर स्क्रीनिंग क्षमता को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित किया है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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