बुधवार, 22 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत-चीन संबंध: व्यापार संतुलन और सीमा पर शांति को विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया ज़रूरी

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता एक "पूर्वशर्त" है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मनीला में अपने…

भारत-चीन संबंध: व्यापार संतुलन और सीमा पर शांति को विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया ज़रूरी
(फोटो: IANS)

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता एक "पूर्वशर्त" है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मनीला में अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ एक बैठक में उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को कूटनीति और संवाद के ज़रिए सुलझाना चाहिए, ताकि वे विवाद का रूप न ले सकें।

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बुधवार को आसियान से जुड़ी बैठकों के दौरान हुई इस द्विपक्षीय वार्ता में डॉ. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए और भारत के लिए निष्पक्ष बाज़ार तक पहुँच और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दे बेहद अहम हैं।

सीमा पर शांति और संबंधों का भविष्य

जयशंकर ने अक्टूबर 2024 में कज़ान में दोनों देशों के नेताओं की बैठक का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसके बाद से भारत-चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की स्पष्ट रूप से पूर्वशर्त है।" विदेश मंत्री के मुताबिक, इस लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्ष लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस पर ध्यान बनाए रखने की ज़रूरत है।

कूटनीति और आपसी सहयोग

दो बड़े पड़ोसी देशों के रूप में भारत और चीन के संबंधों पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा, "यही वजह है हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए। उन्हें उचित तरीके से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।" जयशंकर का मानना था कि आपसी सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के आधार पर स्थिर और सहयोगात्मक संबंध विकसित किए जा सकते हैं, जो एक बहुध्रुवीय एशिया और दुनिया के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

हाल के महीनों में संबंधों को सामान्य बनाने के लिए उठाए गए कदमों का उन्होंने स्वागत किया, जिसमें सीधी उड़ानों की बहाली, वीज़ा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुरू होना और सीमा व्यापार की बहाली शामिल है। साथ ही उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग की सराहना भी की।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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