पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत की सक्रिय कूटनीति, जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों से मिले एस. जयशंकर
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए क्षेत्र के दो प्रमुख देशों, जॉर्डन और मिस्र के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री…
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए क्षेत्र के दो प्रमुख देशों, जॉर्डन और मिस्र के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को अपने समकक्षों से मुलाकात कर मौजूदा हालात पर चर्चा की।
यह बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिसमें जॉर्डन भी ईरान के हमलों से प्रभावित हुआ था। जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी के साथ अपनी बैठक को डॉ. जयशंकर ने बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "पश्चिम एशिया-मध्य पूर्व पर हमारी चर्चा वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण रही।"
क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित बातचीत
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देल अत्ती के साथ हुई चर्चा को भी एस. जयशंकर ने "क्षेत्रीय घटनाक्रमों की एक उपयोगी समीक्षा" करार दिया। गौरतलब है कि मिस्र पश्चिम एशिया की एक बड़ी ताकत है और भारत के साथ उसके ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं।
इसी दौरान, एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, भारत ने 'दो-राज्य समाधान' (Two-State Solution) को लागू करने के लिए बने वैश्विक गठबंधन की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
'दो-राज्य समाधान' के लिए भारत का समर्थन
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "भारत ने दो-राज्य समाधान के लिए अपने स्पष्ट और निरंतर समर्थन की पुष्टि की। भारत का दृष्टिकोण राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ व्यावहारिक समर्थन को जोड़ता है।" इस बैठक की अध्यक्षता सऊदी अरब ने की थी, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीन और इज़रायल के स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में शांतिपूर्वक अस्तित्व पर जोर देना था। संयुक्त राष्ट्र महासभा भी लगातार इस समाधान का समर्थन करती रही है।
इसके अतिरिक्त, डॉ. जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन से भी मुलाकात की। उन्होंने नवंबर में होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) की सफलता के लिए भारत के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। विदेश मंत्री ने बताया, "हमारी विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और जलवायु परिवर्तन सहयोग आगे बढ़ रहा है।" भारत ने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के जरिए एंटीगुआ को 10 लाख डॉलर की सहायता दी है।
इनपुट: IANS



