शनिवार, 4 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कांगो में इबोला का कहर: 1500 से ज़्यादा मामले, WHO ने कहा- स्थिति अभी भी गंभीर

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) एक बड़े इबोला संकट से जूझ रहा है, जहाँ इस बीमारी के 1,500 से ज़्यादा पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को बेहद गंभीर बताया है।

कांगो में इबोला का कहर: 1500 से ज़्यादा मामले, WHO ने कहा- स्थिति अभी भी गंभीर
(फोटो: IANS)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) एक बड़े इबोला संकट से जूझ रहा है, जहाँ इस बीमारी के 1,500 से ज़्यादा पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को बेहद गंभीर बताया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रकोप के चलते अब तक 473 लोगों की जान जा चुकी है।

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शुक्रवार को जारी हुए ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश में 1,502 कन्फर्म मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें से 628 मरीज़ों को अस्पतालों या आइसोलेशन में रखा गया है, जबकि 229 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। इसके अलावा, 213 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें 63 मौतें शामिल हैं।

सबसे बड़ा बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप

अफ्रीका के लिए WHO के क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकूब जनाबी ने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में बताया कि स्थिति गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्रकोप पूर्वी प्रांतों इतुरी और नॉर्थ किवु में फैल रहा है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने जनाबी के हवाले से बताया कि "यह मौजूदा प्रकोप अब तक का सबसे बड़ा बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप है।"

असुरक्षा और खनन बनीं बड़ी चुनौतियाँ

इस संकट को नियंत्रित करने में कई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। DRC में WHO के विशेषज्ञ पियरे अकिलिमाली के अनुसार, यह प्रकोप ऐसे इलाकों में फैला है जो असुरक्षा और हथियारबंद समूहों की गतिविधियों से प्रभावित हैं। इस वजह से नए मामलों का पता लगाना और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) को ढूंढना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इतुरी के कुछ प्रभावित इलाके खनन क्षेत्र में आते हैं, जहाँ बाहर से लोगों की लगातार आवाजाही के कारण वायरस के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

पड़ोसी देशों पर भी असर

इस प्रकोप का असर पड़ोसी देश युगांडा पर भी पड़ा है। युगांडा में WHO के विशेषज्ञ बेंजामिन सेंसासी ने बताया कि गुरुवार तक देश में 20 पुष्ट मामले सामने आए। इनमें से 15 मामले बाहर से आए लोगों के थे, जबकि बाकी पाँच लोग स्थानीय स्तर पर क्वारंटीन के दौरान संक्रमित पाए गए। राहत की बात यह है कि अभी तक वहाँ सामुदायिक संक्रमण (कम्युनिटी ट्रांसमिशन) का कोई मामला नहीं देखा गया है। वायरस को फैलने से रोकने के लिए युगांडा और DRC ने सीमा-पार निगरानी के लिए एक संयुक्त प्रणाली बनाई है और जानकारी साझा करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए हैं।

इलाज के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू

फिलहाल इस बीमारी का कोई पुष्ट टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, WHO ने गुरुवार को घोषणा की कि DRC में बुंडीबुग्यो वायरस से होने वाली इबोला बीमारी के संभावित इलाज का पता लगाने के लिए एक क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है।

इनपुट: IANS

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