कांगो में इबोला का कहर: हर 30 मिनट में एक मौत, पीड़ितों की संख्या 5000 के पार
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) इबोला के अब तक के दूसरे सबसे बड़े प्रकोप से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महामारी की चपेट में आने वालों की संख्या 5,000 से ज्यादा हो गई…
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) इबोला के अब तक के दूसरे सबसे बड़े प्रकोप से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महामारी की चपेट में आने वालों की संख्या 5,000 से ज्यादा हो गई है और यह नए इलाकों में तेजी से फैल रही है, जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है।
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका CDC) ने सोमवार को बताया कि मौजूदा प्रकोप में हर 30 मिनट में लगभग एक व्यक्ति की मौत हो रही है। संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर फैलने की रफ्तार को तुरंत नहीं रोका गया तो यह दुनिया का अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने भी माना, "महामारी हमारे नियंत्रण से अभी बहुत दूर है। हम अभी भी इसके पीछे भाग रहे हैं।"
महामारी के मौजूदा आंकड़े
WHO के रविवार तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के छह प्रांतों के 55 स्वास्थ्य क्षेत्रों में इबोला के 5,021 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 2,378 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिसाब से मृत्यु दर 47.4 प्रतिशत रही है। यह प्रकोप बंडिबुग्यो इबोला वायरस के कारण फैला है और इसने पूर्वी डीआरसी में 2018-2020 के प्रकोप को भी पीछे छोड़ दिया है, जो पहले देश का सबसे घातक प्रकोप था।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, WHO ने बताया कि रिपोर्टिंग के शुरुआती 95 दिनों में मामलों का सात-दिवसीय औसत बढ़कर प्रतिदिन 90 से ज्यादा हो गया है, जो 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीका और DRC के 2018-2020 के प्रकोप की तुलना में काफी अधिक है। पूर्वी प्रांत इतुरी 84.8% मामलों के साथ इसका केंद्र बना हुआ है, लेकिन संक्रमण पड़ोसी प्रांतों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
नई वैक्सीन और इलाज की तलाश
इस प्रकोप की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी प्रायोगिक वैक्सीन और इलाज अपनाने पर मजबूर हैं। डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने कहा कि "बहुत तेज और बहुत जोरदार" प्रतिक्रिया के बावजूद यह प्रकोप असामान्य रूप से तेजी से फैला है।
WHO महानिदेशक टेड्रोस ने बताया कि बंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ दो विशेष वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल शुरू हो गया है। इसके अलावा एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर और एक्सपेरिमेंटल मोनोक्लोनल एंटीबॉडी एमबीपी134 की भी जांच की जा रही है, जिसके शुरुआती नतीजे तीन से चार हफ्तों में आने की उम्मीद है। साथ ही, वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि क्या जैरे इबोला वायरस के खिलाफ लाइसेंस-प्राप्त वैक्सीन 'एर्वेबो' इस वायरस से भी सुरक्षा दे सकती है या नहीं।
पड़ोसी देशों में फैलने का खतरा
WHO ने चेतावनी दी है कि डीआरसी के अंदर प्रकोप के और फैलने का जोखिम "बहुत ज्यादा" बना हुआ है। संगठन के अनुसार, पड़ोसी देशों युगांडा, दक्षिण सूडान और सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में भी बाहर से संक्रमण आने का खतरा बहुत अधिक है, क्योंकि इनकी सीमाएं प्रकोप वाले इलाकों से सटी हैं और लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
इनपुट: IANS



