बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

पूर्व मंत्री सुजीत बोस की ज़मानत पर सुनवाई से जज ने ख़ुद को क्यों किया अलग? सामने आई यह 'दुर्भाग्यपूर्ण वजह'

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे कलकत्ता हाईकोर्ट के एक जज ने एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में ख़ुद को इस मामले से अलग कर लिया है। जस्टिस सुव्रा घोष ने अपने चैंबर में…

पूर्व मंत्री सुजीत बोस की ज़मानत पर सुनवाई से जज ने ख़ुद को क्यों किया अलग? सामने आई यह 'दुर्भाग्यपूर्ण वजह'
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे कलकत्ता हाईकोर्ट के एक जज ने एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में ख़ुद को इस मामले से अलग कर लिया है। जस्टिस सुव्रा घोष ने अपने चैंबर में पूर्व मंत्री के वकील द्वारा किए गए एक 'दुर्भाग्यपूर्ण' प्रयास को इसकी वजह बताया। यह फ़ैसला सुनवाई पूरी होने और आदेश सुरक्षित रखे जाने के बाद आया है, जिससे मामला अब फिर से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास पहुँच गया है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस सुव्रा घोष ने बताया कि मंगलवार को जब वह अपने चैंबर में नहीं थीं, तब सुजीत बोस के एक वकील ने उनके निजी सचिव से केस से जुड़ी एक फ़ाइल सौंपने के लिए कहा। इस घटना को बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मानते हुए जस्टिस घोष ने इसकी सूचना कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती को दी और फिर याचिका पर फ़ैसला सुनाने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

तृणमूल कांग्रेस के विधायक और पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री रहे सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगर पालिका नौकरी घोटाले के सिलसिले में 11 मई को गिरफ़्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं और उन्होंने अपनी ज़मानत के लिए जस्टिस घोष की सिंगल बेंच में अर्ज़ी लगाई थी। इस याचिका पर सुनवाई 17 अगस्त को ही पूरी हो गई थी और फ़ैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

ED ने लगाए हैं ये गंभीर आरोप

ED का आरोप है कि सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगर पालिका में नौकरियों के लिए लगभग 150 उम्मीदवारों के नामों की अवैध रूप से सिफ़ारिश की थी। जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट में यह भी दावा किया है कि इस कथित भ्रष्टाचार से हुई कमाई को सुजीत बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा किया गया था। गिरफ़्तारी से पहले ED ने बोस से कई दौर की पूछताछ भी की थी। अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे कि ज़मानत याचिका पर सुनवाई के लिए किस नई बेंच को यह मामला सौंपा जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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