जापान: क्या अपनी परमाणु नीति बदलेगा? प्रधानमंत्री कार्यालय ने सहयोगी दल को दिए अहम संकेत
जापान में दशकों पुरानी गैर-परमाणु नीति पर एक नई बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपनी गठबंधन सहयोगी 'जापान इनोवेशन पार्टी' (JIP) को इस नीति पर पुनर्विचार के लिए "एक कदम और आगे बढ़ने" का सुझाव…
जापान में दशकों पुरानी गैर-परमाणु नीति पर एक नई बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपनी गठबंधन सहयोगी 'जापान इनोवेशन पार्टी' (JIP) को इस नीति पर पुनर्विचार के लिए "एक कदम और आगे बढ़ने" का सुझाव दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि सरकार के भीतर देश की सुरक्षा रणनीति को लेकर गहरे मंथन का दौर चल रहा है।
जापान की तीन गैर-परमाणु नीतियां देश में परमाणु हथियार न रखने, न बनाने और न ही लाने की इजाजत देने के सिद्धांत पर आधारित हैं। इसी साल जून में, JIP ने प्रधानमंत्री साने ताकाइची को एक प्रस्ताव सौंपकर देश के तीन प्रमुख सुरक्षा दस्तावेजों में बदलाव करने की मांग की थी। इसमें विशेष रूप से "परमाणु हथियार न लाने" की नीति की "यथार्थवादी समीक्षा" करने का आग्रह किया गया था।
सहयोगी दल पर दबाव
मेनिची शिंबुन अखबार की एक रिपोर्ट में JIP के एक सूत्र के हवाले से कहा गया है, "एलडीपी पर हर तरह के बोझ हैं, और कुछ बातें ऐसी हैं जो वह खुद नहीं कह पा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि हम चाहते हैं कि आप एक कदम और आगे बढ़ें।" JIP, सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) गठबंधन का सबसे छोटा सहयोगी दल है।
JIP के प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि जापान को अमेरिका के 'विस्तारित परमाणु सुरक्षा कवच' (Extended Nuclear Deterrence) का असर बढ़ाने के लिए वाशिंगटन से सलाह-मशविरा करना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
प्रस्ताव के पीछे की कहानी
यह भी सामने आया है कि प्रस्ताव तैयार करने से पहले JIP के वरिष्ठ नेताओं ने रक्षा मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी काज़ुहिसा शिमाडा और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के पूर्व प्रमुख कियोफुमी इवाता से गुप्त बातचीत की थी। प्रस्ताव में शिमाडा के विचारों को लगभग हूबहू शामिल किया गया था।
मेनिची शिंबुन के अनुसार, इस चर्चा के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका की नई समुद्र-आधारित क्रूज मिसाइल है, जिसे 2032 के बाद तैनात किया जाना है। परमाणु क्षमता वाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 2,000 से 2,500 किलोमीटर है। ये मिसाइलें ले जाने वाले युद्धपोत जापान के आसपास गश्त कर सकते हैं और योकोसुका स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर रुक भी सकते हैं, जिससे गैर-परमाणु नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री का रुख
खुद प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी प्रधानमंत्री बनने से पहले संकेत दे चुकी हैं कि वह "न्यूक्लियर हथियार न लाने" वाले सिद्धांत को बदलना चाहती हैं। JIP के अनुसार, प्रस्ताव तैयार करते समय पार्टी ने "प्रधानमंत्री के करीबी लोगों के साथ बातचीत बनाए रखी थी," जिसमें मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा और सुरक्षा नीति पर प्रधानमंत्री के सलाहकार सदामासा ओउए भी शामिल थे।
इनपुट: IANS



