रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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मेकेदातु बांध विवाद: DMK ने संसद में बहस के लिए दोनों सदनों में दिया स्थगन प्रस्ताव

कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने अपना विरोध तेज़ कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इस…

मेकेदातु बांध विवाद: DMK ने संसद में बहस के लिए दोनों सदनों में दिया स्थगन प्रस्ताव
(फोटो: IANS)

कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने अपना विरोध तेज़ कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस पेश किया है।

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DMK का कहना है कि यह परियोजना तमिलनाडु की जल सुरक्षा और लाखों किसानों की आजीविका के लिए एक गंभीर ख़तरा है। पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इसे सार्वजनिक महत्व का अत्यावश्यक विषय मानते हुए अन्य सभी निर्धारित संसदीय कार्यवाही को स्थगित कर इस पर बहस कराई जाए। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर इस जलाशय के निर्माण को आगे बढ़ाने की कोशिशों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

संसद में DMK की रणनीति

लोकसभा में DMK संसदीय दल के नेता टी.आर. बालू ने अध्यक्ष को स्थगन प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। अपने नोटिस में उन्होंने तर्क दिया है कि कर्नाटक की बांध बनाने की एकतरफा योजना का तमिलनाडु पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा, खासकर उन किसानों पर जो कावेरी के पानी पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित जलाशय राज्य को मिलने वाले नदी जल के हिस्से को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और कावेरी डेल्टा क्षेत्र के कृषि समुदायों की आजीविका को खतरे में डाल सकता है।

इसी तरह, राज्यसभा में DMK के फ्लोर लीडर तिरुचि शिवा ने भी स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। शिवा ने अपने नोटिस में इस बात पर जोर दिया है कि प्रस्तावित बांध के तमिलनाडु के लिए महत्वपूर्ण कानूनी, पर्यावरणीय और कृषि संबंधी परिणाम होंगे, इसलिए इस पर तत्काल चर्चा आवश्यक है।

पार्टी का स्पष्ट रुख

DMK लगातार यह कहती रही है कि मेकेदातु परियोजना निचले तटीय राज्यों की सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। पार्टी ने तमिलनाडु में कावेरी के जल प्रवाह को कम करने वाले किसी भी कदम का हमेशा विरोध किया है। पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि केंद्र सरकार को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और जल बंटवारे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए। इन दोनों नोटिसों को आगामी सत्र के दौरान इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की DMK की एक समन्वित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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