संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाई आवाज: युद्ध कहीं भी हो, महंगाई की मार दुनिया झेलती है
दुनिया के किसी भी कोने में हो रहे युद्ध का असर सिर्फ लड़ाई के मैदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर बैठे आम परिवारों की जेब पर भी पड़ता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…
दुनिया के किसी भी कोने में हो रहे युद्ध का असर सिर्फ लड़ाई के मैदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर बैठे आम परिवारों की जेब पर भी पड़ता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत समेत कई विकासशील देशों ने संयुक्त राष्ट्र में यह चिंता जाहिर की है कि संघर्षों के कारण खाद्य और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे उन देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है जिनका इन लड़ाइयों से सीधा कोई लेना-देना नहीं है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि लड़ाई से दूर के देशों को भी भोजन, ईंधन, उर्वरक और व्यापार सप्लाई में आने वाली रुकावटों की कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा, "जो देश इन हालात से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है।" जयशंकर ने कहा कि शांति बनाए रखने में विफलता से सुरक्षा कमजोर होती है और विकास की रफ्तार पर भी असर पड़ता है, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ रहा है।
छोटे देशों पर चौतरफा असर
कैरेबियन से लेकर हिंद महासागर और अफ्रीका तक के कई नेताओं ने इस वैश्विक आर्थिक प्रभाव पर अपनी आवाज बुलंद की। डोमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रपति लुइस अबिनादर ने कहा कि यूरोप और मध्य पूर्व के युद्ध भले ही 'हमारे समुद्री तटों से बहुत दूर' हों, लेकिन उनका सीधा असर उनके देश में भोजन और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ता है। इसी तरह, कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली असौमानी ने बताया कि मध्य पूर्व के संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से कोमोरोस जैसे कमजोर और आयात पर निर्भर देशों की खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
मालदीव के उपराष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद लतीफ ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज असुरक्षा सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री रास्तों, सप्लाई चेन और वित्तीय बाजारों के जरिए पूरी दुनिया में फैलती है। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने से ईंधन की कीमतें बढ़ीं, जिसका असर मालदीव के पर्यटन और सरकारी वित्त पर भी पड़ा।
भारत की चिंता और वैश्विक अपील
भारत ने विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध और खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष पर चिंता व्यक्त की है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और ऊर्जा व व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और ऊर्जा तथा उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए वैश्विक व्यापार मार्गों पर निर्भर है, इसलिए ईंधन और माल ढुलाई की कीमतों में कोई भी वृद्धि सीधे तौर पर भारतीय परिवारों के बजट को प्रभावित कर सकती है।
पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने इस वैश्विक समस्या को 'खुद को मिलकर नुकसान पहुंचाने का सिलसिला' बताया और इसे खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने युद्धों के आर्थिक असर को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाने की मांग की। लातविया के राष्ट्रपति एडगर्स रिंकेविच ने भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन, मध्य पूर्व या लाल सागर में जो कुछ भी होता है, उसका असर सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहता।
इनपुट: IANS



