मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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यमन: संघर्ष के बीच हजारों परिवार विस्थापित, स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराया संकट

यमन में चल रहे संघर्ष के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे भोजन और आश्रय का गंभीर संकट पैदा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अगस्त से अब तक…

यमन: संघर्ष के बीच हजारों परिवार विस्थापित, स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराया संकट
(फोटो: IANS)

यमन में चल रहे संघर्ष के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे भोजन और आश्रय का गंभीर संकट पैदा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अगस्त से अब तक करीब 21,000 परिवार विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर ताइज और लहज प्रांतों के हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों का कहना है कि पंजीकरण अभी जारी है, इसलिए यह संख्या और बढ़ने की आशंका है।

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लगातार बढ़ती हिंसा के बीच राहत सामग्री तेजी से घट रही है, जबकि विस्थापितों की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) और उसके सहयोगी संगठनों ने मदद बढ़ाई है, लेकिन पैसों की कमी और कई इलाकों तक पहुंच में आ रही बाधाओं के कारण राहत कार्यों में रुकावट आ रही है।

नागरिकों और स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले

संघर्ष का सबसे बुरा असर आम नागरिकों और स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 1 अगस्त से अब तक 36 घटनाओं की पुष्टि की है, जिनमें 32 लोगों की मौत हुई और 93 लोग घायल हुए। चिंता की बात यह है कि इस महीने हताहत हुए लोगों में 80 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि हताहतों की वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। OCHA के अनुसार, शुक्रवार को लहज प्रांत में एम्बुलेंस पर हुए हमलों में एक ड्राइवर और एक आपातकालीन चिकित्सा कर्मचारी की मौत हो गई। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ताइज, लहज और अल-होदेदाह में नौ स्वास्थ्य केंद्र या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं, बंद हो गए हैं या उन पर सीधे हमले हुए हैं। जो अस्पताल घायलों का इलाज कर रहे हैं, वे भी खून, एनेस्थीसिया और ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान की कमी से जूझ रहे हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ा खतरा

इस संकट का खामियाजा महिलाओं और लड़कियों को भुगतना पड़ रहा है। यमन में हर दिन गर्भावस्था या प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण तीन महिलाओं की मौत हो जाती है, और हालिया लड़ाई ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का अनुमान है कि विस्थापित आबादी में 2,700 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं हैं।

इनमें से लगभग 300 महिलाओं का प्रसव अगले दो हफ्तों में होने की उम्मीद है, जबकि कम से कम 500 को आपातकालीन प्रसूति देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। ताइज में कई महत्वपूर्ण प्रसव सेवाएं बंद हो चुकी हैं, जिसके चलते कुछ विस्थापित महिलाओं को बिना किसी प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता के खुले में बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

राहत प्रयास और अपील

इन चुनौतियों के बावजूद, मानवीय सहायता संगठन मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक करीब 13,000 विस्थापित परिवारों को तत्काल जरूरत वाली राहत किट दी जा चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी अदन और मारिब के चार अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान और एंटीबायोटिक दवाएं पहुंचाई हैं। OCHA ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से आम नागरिकों, स्वास्थ्य कर्मियों और एम्बुलेंस की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि जरूरतमंदों तक बिना रुकावट मानवीय सहायता पहुंच सके।

इनपुट: IANS

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