सेबी का खुलासा: एक ही 25 करोड़ को 40 बार घुमाकर कैसे बनाया 1000 करोड़ का कर्ज़? धेनु बिल्डकॉन पर गंभीर आरोप
बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड द्वारा एक बड़े वित्तीय गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि कंपनी ने मात्र 25 करोड़ रुपये की एक ही राशि को बार-बार कई खातों में घुमाकर…
बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड द्वारा एक बड़े वित्तीय गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि कंपनी ने मात्र 25 करोड़ रुपये की एक ही राशि को बार-बार कई खातों में घुमाकर 1,000 करोड़ रुपये का असुरक्षित कर्ज़ दिखाया, जो असल में था ही नहीं। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी व्यवस्था आपस में जुड़ी कई कंपनियों के एक जटिल नेटवर्क के ज़रिए की गई।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा पारित एक अंतरिम आदेश में इस मामले का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। जांच के मुताबिक, इस कथित धोखाधड़ी को सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन ने अंजाम दिया, जिसमें धेनु बिल्डकॉन और उससे जुड़ी कई अन्य संस्थाएं शामिल थीं।
कैसे हुआ यह पूरा खेल?
जांच में सामने आया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान धेनु बिल्डकॉन ने कागज़ों पर सात संस्थाओं से 1,000 करोड़ रुपये का असुरक्षित कर्ज़ प्राप्त किया। इसके बाद, दिसंबर 2025 में कंपनी ने इसी कर्ज़ में से 840 करोड़ रुपये की रकम को इक्विटी में बदलने के लिए छह संस्थाओं को तरजीही शेयर (Preferential Allotment) जारी कर दिए।
हालांकि, जब सेबी ने इन लेनदेन में शामिल संस्थाओं के बैंक खातों की पड़ताल की, तो एक अलग ही कहानी सामने आई। पता चला कि 1,000 करोड़ रुपये का यह विशाल आंकड़ा असल में 25 करोड़ रुपये की एक ही मूल राशि को कई स्तरों पर बार-बार घुमाने और प्रसारित करने से बनाया गया था। नियामक ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआती 25 करोड़ रुपये की यह राशि भी अन्य जुड़ी हुई संस्थाओं से संदिग्ध फंड लेनदेन के ज़रिए आई थी।
आपस में जुड़ी थीं सभी संस्थाएं
सेबी ने धेनु बिल्डकॉन, कर्ज़ देने वाली कंपनियों और तरजीही आवंटन पाने वाली संस्थाओं के बीच गहरे संबंध पाए। जांच में इन कंपनियों के पते, निदेशक, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और बैंक शाखाएं एक जैसी पाई गईं। इसके अलावा, इन संस्थाओं के बीच बड़े पैमाने पर एक-दूसरे की शेयर हिस्सेदारी भी थी। नियामक के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का स्वामित्व, नियंत्रण या प्रबंधन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन के हाथों में था।
नियामक ने अपनी जांच में एक असंबंधित मामले में ज़ब्त किए गए चैट संदेशों और कॉल रिकॉर्ड का भी हवाला दिया है, जिनसे इस नेटवर्क पर नियंत्रण के सबूत मिले। जब इन संस्थाओं के पंजीकृत कार्यालयों का भौतिक निरीक्षण किया गया, तो वहां भी उनकी कोई वास्तविक भौतिक मौजूदगी या ठोस व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली। सेबी ने यह भी गौर किया कि ये कथित लेनदेन उस समय हुए जब धेनु बिल्डकॉन के शेयर बाज़ार मूल्यांकन में नाटकीय वृद्धि देखी गई थी।
इनपुट: IANS



