बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला: सत्येंद्र जैन समेत 6 आरोपी न्यायिक हिरासत में, 25 अगस्त को जमानत पर सुनवाई

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज…

दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला: सत्येंद्र जैन समेत 6 आरोपी न्यायिक हिरासत में, 25 अगस्त को जमानत पर सुनवाई
(फोटो: IANS)

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत अब सत्येंद्र जैन और चार अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 25 अगस्त को सुनवाई करेगी।

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दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने इस मामले में 18 अगस्त को कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से डीजेबी के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव को कोर्ट ने पूछताछ के लिए दो दिन की एसीबी हिरासत में भेजा है। एजेंसी ने दलील दी कि टेंडर प्रक्रिया की तकनीकी शर्तों में बदलाव और दस्तावेजों की कथित साझेदारी को लेकर अंकित से विस्तृत पूछताछ की जानी है।

कौन-कौन गया न्यायिक हिरासत में?

अंकित श्रीवास्तव के अलावा बाकी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इनमें पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ व आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, एएन इंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक इन्वॉयरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जियों पर एसीबी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आईएएस उदित प्रकाश राय की जमानत याचिका पर गुरुवार को अलग से सुनवाई होगी।

क्या हैं ACB के आरोप?

यह मामला डीजेबी के एसटीपी के अपग्रेडेशन और क्षमता विस्तार के लिए जारी किए गए टेंडर में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है, जिसकी एफआईआर एसीबी ने 11 मई 2024 को दर्ज की थी। एसीबी का आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों में बदलाव करके एक विशेष कंपनी 'यूरोटेक एनवॉयरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड' को फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इसके लिए ऐसी शर्तें जोड़ी गईं जिससे दूसरी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और प्रस्तावित पायलट स्टडी भी नहीं कराई गई।

एजेंसी का कहना है कि इन बदलावों से सरकारी खजाने को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ। इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के विश्लेषण से सरकारी अधिकारियों, निजी कंपनियों और बिचौलियों के बीच सांठगांठ का पता चला है। आरोप है कि टेंडर के दस्तावेज प्रकाशित होने से पहले ही आपस में साझा कर लिए गए थे। एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है और जांच अभी जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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