तमिलनाडु में मानसून के साथ डेंगू का प्रकोप बढ़ा, सरकार ने उठाए बड़े कदम
मानसून की दस्तक के साथ ही तमिलनाडु में डेंगू के मामले तेज़ी से बढ़ने लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में हाल ही में जांचे गए 1,320 सैंपलों…
मानसून की दस्तक के साथ ही तमिलनाडु में डेंगू के मामले तेज़ी से बढ़ने लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में हाल ही में जांचे गए 1,320 सैंपलों में से 244 में डेंगू की पुष्टि हुई है। राज्य में हर दिन लगभग 200 मामले सामने आ रहे हैं, जिसने सरकार और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
15 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में इस साल डेंगू के कुल 16,577 मामले दर्ज किए गए हैं, और इस बीमारी से नौ लोगों की जान जा चुकी है। चेन्नई जिला इस प्रकोप से सबसे ज़्यादा प्रभावित है, जहां एक ही दिन में बुखार के 156 मरीज़ भर्ती हुए, जिनमें से 87 में डेंगू पाया गया। चेंगलपट्टू, कोयंबटूर, तिरुवनमलाई, कृष्णागिरी, और सलेम समेत कई अन्य ज़िलों में भी मामलों की संख्या बढ़ी है।
सरकार की तैयारी और स्वास्थ्य मंत्री की अपील
बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने मच्छर नियंत्रण और रोग निगरानी अभियान तेज़ कर दिए हैं। इस काम के लिए पूरे तमिलनाडु में 25,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को तैनात किया गया है। ये टीमें संवेदनशील इलाकों में मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने, सफाई अभियान चलाने और बुखार के मामलों पर नज़र रखने का काम कर रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री अरुण राज ने चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए माना कि पिछले सात दिनों में डेंगू के मामलों में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन उन्होंने लोगों से घबराने की बजाय सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को रोकथाम के उपाय मज़बूत करने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विपक्ष का आरोप और एक छात्र की मौत पर स्पष्टीकरण
इस बीच, नाम तमिलर काची के मुख्य समन्वयक सीमान ने मामलों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार की कथित लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मांग की है कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर युद्ध स्तर पर नीलावेम्बु काढ़ा और कबासुरा कुडीनीर बांटा जाए।
इसी दौरान, अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र हरीश कुमार की गुरुवार को लगातार बुखार के बाद मृत्यु हो गई, जिससे परिसर में चिंता फैल गई। हालांकि, जन स्वास्थ्य निदेशालय ने स्पष्ट किया कि हरीश को डेंगू नहीं था और उनकी मौत स्क्रब टाइफस से हुई थी।
भारत में जल्द आ सकती है पहली डेंगू वैक्सीन
डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच एक उम्मीद की किरण भी है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जापान की ताकेडा फार्मास्युटिकल के साथ मिलकर भारत की पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' लॉन्च करने की तैयारी में है। यह वैक्सीन अगले साल की पहली छमाही तक बाज़ार में आ सकती है। इसे 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह तीन महीने के अंतराल पर दो खुराकों में दी जाएगी। दावा है कि यह टीका डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करेगा।
इनपुट: IANS



