सोमवार, 3 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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टेरर केस: कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी की उम्रकैद को चुनौती, हाईकोर्ट ने NIA से जवाब मांगा

कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को आतंकी साजिश के एक मामले में मिली उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने राष्ट्रीय…

टेरर केस: कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी की उम्रकैद को चुनौती, हाईकोर्ट ने NIA से जवाब मांगा
(फोटो: IANS)

कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को आतंकी साजिश के एक मामले में मिली उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA) को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीजन बेंच अक्टूबर में इस मामले की अगली सुनवाई करेगी।

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अंद्राबी के साथ-साथ उनकी दो सहयोगियों, सूफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन ने भी अपनी सज़ा के खिलाफ अपील की है। ट्रायल कोर्ट ने इन दोनों को 30 साल कैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों की सज़ा पर रोक लगाने की अर्जी पर भी एंटी-टेरर एजेंसी से जवाब मांगा है।

क्या था निचली अदालत का फैसला?

इसी साल की शुरुआत में, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आसिया अंद्राबी को आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने और भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने जैसे गंभीर अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। एडिशनल सेशन जज चंद्र जीत सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि दोषियों के काम "भारत के अस्तित्व पर चोट" करते हैं और उनका मकसद देश के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर को अलग करना था।

ट्रायल कोर्ट ने यह भी पाया था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से साबित होता है कि दोषियों ने हिंसा को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दिया। उन्होंने मारे गए उग्रवादियों की तारीफ की और अलगाववादी विचारधारा का प्रचार किया। अदालत ने टिप्पणी की कि युवाओं के मन में यह बात बैठाना कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है, उन्हें हिंसा सहित कोई भी रास्ता अपनाने के लिए उकसा सकता है।

NIA की जांच और आरोप

यह मामला 2018 में NIA द्वारा दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अंद्राबी के नेतृत्व वाला प्रतिबंधित संगठन 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' सोशल मीडिया और सार्वजनिक भाषणों के जरिए जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की वकालत कर रहा था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपियों ने पत्थरबाजी जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए उकसाया और 'दो-राष्ट्र सिद्धांत' पर आधारित नैरेटिव को बढ़ावा दिया।

अंद्राबी को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18 (आतंकी साजिश) और 20 (आतंकी संगठन की सदस्यता) के साथ-साथ IPC के तहत आपराधिक साजिश और देश के खिलाफ जंग छेड़ने का दोषी ठहराया गया था। उनकी सहयोगियों फहमीदा और नसरीन को भी UAPA और IPC की कई धाराओं के तहत दोषी पाया गया था। अंद्राबी ने 1987 में 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की स्थापना की थी और उन्हें अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया गया था।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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