DU छात्रसंघ चुनाव में 50% महिला आरक्षण की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और UGC को भेजा नोटिस
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) और उससे जुड़े कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर…
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) और उससे जुड़े कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शबाना हुसैन की याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए नवंबर की तारीख तय की है। यह याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 13 अगस्त, 2026 को छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना जारी करने के बाद दायर की गई है।
याचिका में क्या तर्क दिए गए हैं?
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्राओं की संख्या काफी ज्यादा होने के बावजूद छात्र राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बेहद कम है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में धनबल, बाहुबल और हिंसा जैसी अनियमितताओं के कारण छात्राएं सक्रिय राजनीति में भाग लेने से हिचकिचाती हैं। अधिवक्ता आशु बिधूड़ी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि छात्राओं से जुड़े अहम मुद्दे, जैसे यौन उत्पीड़न, सुरक्षा और छात्रावासों के कर्फ्यू समय, छात्र राजनीति में ठीक से नहीं उठाए जाते।
याचिका में जोर दिया गया है कि "राजनीतिक भागीदारी केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में सार्थक प्रतिनिधित्व भी इसका हिस्सा है।"
अन्य कानूनों और सिफारिशों का हवाला
अपनी मांग के समर्थन में याचिकाकर्ता ने कई उदाहरण पेश किए हैं। इसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है, तो यह सिद्धांत छात्र राजनीति में भी लागू होना चाहिए। साथ ही, उत्तराखंड सरकार के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया है, जहां राज्य के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण अनिवार्य है।
याचिका में लिंगदोह समिति की सिफारिशों का भी जिक्र है, जिनका उद्देश्य छात्र चुनावों में धन और बाहुबल के प्रभाव को कम करना था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन सिफारिशों का लगातार उल्लंघन हो रहा है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
पहले भी उठ चुकी है यह मांग
याचिकाकर्ता शबाना हुसैन, जो 2017 में देशबंधु कॉलेज छात्रसंघ की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं, ने इससे पहले भी विभिन्न मंचों पर यह मांग उठाई थी। उन्होंने अक्टूबर 2023 में दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और 2024 में केंद्र सरकार व अन्य अधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था। सितंबर 2024 में भी इसी तरह की एक याचिका पर हाई कोर्ट ने सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय को तीन सप्ताह के भीतर हुसैन के आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
इनपुट: IANS



