मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

लोकसभा में DMK सांसद दयानिधि मारन की मांग: 'पेपर लीक का समाधान नहीं, NEET को ही खत्म करे सरकार'

लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद दयानिधि मारन ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार…

लोकसभा में DMK सांसद दयानिधि मारन की मांग: 'पेपर लीक का समाधान नहीं, NEET को ही खत्म करे सरकार'
(फोटो: IANS)

लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद दयानिधि मारन ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी के नतीजों से निपटने की कोशिश कर रही है, जबकि उनकी पार्टी नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) को ही खत्म करने की मांग कर रही है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मंगलवार को हुई चर्चा में मारन ने तर्क दिया कि प्रस्तावित कानून NEET प्रणाली की बुनियादी खामियों को दूर करने में विफल है। उन्होंने कहा कि केवल पेपर लीक के खिलाफ कानून को मजबूत करने के बजाय इस परीक्षा को ही समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

छात्रों पर दबाव और असमानता का आरोप

डीएमके सांसद ने आरोप लगाया कि NEET ने ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए एक असमान अवसर पैदा किया है। उन्होंने कहा कि इसके कारण कई छात्रों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए महंगे कोचिंग सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ता है, और स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई प्रतिभाशाली छात्र अवसरों से वंचित रह जाते हैं।

छात्र आत्महत्याओं का गंभीर मुद्दा उठाते हुए दयानिधि मारन ने दावा किया कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण 107 छात्रों ने अपनी जान दी है, जिनमें से 93 मामले सीधे तौर पर NEET से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले तमिलनाडु में ही NEET से संबंधित 26 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, जो इस परीक्षा द्वारा बनाए गए असहनीय दबाव को दर्शाता है।

सरकार का पक्ष और विधेयक के प्रावधान

बहस के दौरान केंद्र सरकार ने संशोधन विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता को बनाए रखना है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ कड़े उपाय शामिल हैं, जैसे- एक विशेष टास्क फोर्स का गठन, समयबद्ध जांच और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना। सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक भी देखने को मिली, जिसमें कई सदस्यों ने परीक्षा की शुचिता और पेपर लीक पर चिंता जताई।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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