मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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नवीन पटनायक और वीके पांडियन को बड़ी राहत, सरकारी फंड के दुरुपयोग के मामले में याचिका खारिज

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और उनके करीबी सहयोगी वीके पांडियन को एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भुवनेश्वर की एक सत्र अदालत ने उनके खिलाफ सरकारी धन के…

नवीन पटनायक और वीके पांडियन को बड़ी राहत, सरकारी फंड के दुरुपयोग के मामले में याचिका खारिज
(फोटो: IANS)

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और उनके करीबी सहयोगी वीके पांडियन को एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भुवनेश्वर की एक सत्र अदालत ने उनके खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर दायर की गई एक पुनरीक्षण याचिका (revision petition) को खारिज कर दिया है।

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यह याचिका भुवनेश्वर के एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर चरण मोहंती द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने पहले इस मामले को निचली अदालत, यानी एसडीजेएम (SDJM), भुवनेश्वर के समक्ष उठाया था, लेकिन 25 मार्च, 2026 को उनकी शिकायत वहां भी खारिज कर दी गई थी। इसी फैसले को उन्होंने सत्र अदालत में चुनौती दी थी।

क्या थे आरोप?

याचिकाकर्ता सुधीर मोहंती ने आरोप लगाया था कि नवीन पटनायक और वीके पांडियन ने ओडिशा के सभी जिलों का दौरा करने के लिए सरकारी खजाने से बिना किसी मंजूरी के कई बार हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी शिकायत में सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए यह भी दावा किया था कि इन यात्राओं का खर्च खनन मालिकों, भू-माफियाओं, रियल एस्टेट ऑपरेटरों और अन्य स्रोतों से मिले बेहिसाब पैसे से उठाया गया था।

मोहंती ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 14 अगस्त, 2024 को भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जब 19 अगस्त, 2024 तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त (DCP) को लिखित शिकायत दी। उनके अनुसार, वहां भी एफआईआर दर्ज नहीं होने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत ने याचिका क्यों खारिज की?

खुर्दा, भुवनेश्वर के सत्र न्यायाधीश बिरंची नारायण मोहंती ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत (एसडीजेएम) के 25 मार्च, 2026 के आदेश में कोई भी गैरकानूनी बात नहीं पाई गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत में लगाए गए किसी भी आरोप को साबित करने के लिए सबूत पेश नहीं कर सके।

अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(4) की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया था और न ही उनके पास BNSS, 2023 की धारा 33 के तहत शिकायत दर्ज करने का कानूनी अधिकार था। इन्हीं आधारों पर पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया गया।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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