MSME को मिलेगी सस्ती पेशेवर मदद, सरकार ने शुरू की 'कॉर्पोरेट मित्र' योजना
छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) को कानूनी और नियामकीय कामों में किफायती मदद देने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसे 'कॉर्पोरेट मित्र' नाम दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) को कानूनी और नियामकीय कामों में किफायती मदद देने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसे 'कॉर्पोरेट मित्र' नाम दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का मकसद प्रशिक्षित और सर्टिफाइड पैरा-प्रोफेशनल्स का एक ऐसा समूह तैयार करना है, जो छोटे कारोबारियों की अनुपालन (कंप्लायंस) संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा कर सके।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला ने इस पहल पर कहा, "इसका उद्देश्य अनुपालन को एक बोझ से बदलकर विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्थित विकास का माध्यम बनाना है।" उन्होंने कहा कि यह पहल कंप्लायंस को डरावना नहीं, बल्कि आसान बनाएगी और इससे जुड़ी जानकारी को सभी के लिए सुलभ करेगी।
क्या है 'कॉर्पोरेट मित्र' कार्यक्रम?
इस योजना की घोषणा सबसे पहले केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) बनाना है, जो देश के MSME सेक्टर के विकास में योगदान दे सके। इसके तहत तैयार हुए पैरा-प्रोफेशनल्स कारोबार करने में आसानी, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगे।
यह कार्यक्रम तीन प्रमुख प्रोफेशनल संस्थानों - इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई), इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीओएआई) की विशेषज्ञता को आईआईटी मद्रास, आईआईटी मद्रास प्रवर्तक और स्वयं प्लस के तकनीकी सहयोग से जोड़ता है। इन संस्थानों ने कोर्स शुरू भी कर दिया है और पहले बैच में 2,879 लोगों ने पंजीकरण कराया है।
कैसे होगी ट्रेनिंग?
'कॉर्पोरेट मित्र' कोर्स की कुल अवधि 12 महीने है, जिसे दो हिस्सों में बांटा गया है।
- पहला चरण (6 महीने): इसमें रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर के माध्यम से लगभग 150 घंटे की अकादमिक पढ़ाई शामिल है।
- दूसरा चरण (6 महीने): इसके बाद शिक्षार्थियों को आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीओएआई के सदस्यों की पेशेवर फर्मों में छह महीने की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
इनपुट: IANS



