CIA के 'माइंड-कंट्रोल' प्रयोग: अमेरिकी कांग्रेस में उठा दशकों पुराना राज़, नए खुलासों की मांग
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के बदनाम 'माइंड-कंट्रोल' कार्यक्रम MK-Ultra का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। अमेरिकी कांग्रेस की एक सुनवाई में सांसदों और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने दशको
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के बदनाम 'माइंड-कंट्रोल' कार्यक्रम MK-Ultra का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। अमेरिकी कांग्रेस की एक सुनवाई में सांसदों और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने दशकों तक अपने इस गुप्त कार्यक्रम की सच्चाई छिपाई, जिसके तहत विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और जेलों में आम नागरिकों पर उनकी जानकारी के बिना खतरनाक प्रयोग किए गए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते हुई सुनवाई में शीत युद्ध के दौर के इस कार्यक्रम से जुड़े कई परेशान करने वाले तथ्य सामने रखे गए।
यह सुनवाई फेडरल सीक्रेट्स को सार्वजनिक करने के मामले में बनी 'हाउस ओवरसाइट एंड अकाउंटेबिलिटी कमेटी' की एक विशेष टास्क फोर्स ने की। इसमें इतिहासकार स्टीफन किंजर और पत्रकार टॉम ओ'नील ने गवाही दी। दोनों विशेषज्ञों का तर्क था कि कार्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड या तो जानबूझकर नष्ट कर दिए गए या उनमें से भारी मात्रा में जानकारी हटा दी गई, जिससे पूरी सच्चाई आज तक सामने नहीं आ सकी है।
साजिश या सरकारी नीति?
सुनवाई की अध्यक्षता कर रहीं टास्क फोर्स की अध्यक्ष अन्ना पॉलिना लुना ने कहा कि MK-Ultra कोई गलती या नियंत्रण से बाहर हुआ कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने इसे "सरकार का एक सोच-समझकर और व्यवस्थित तरीके से चलाया गया ऑपरेशन" बताया। लुना के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत अमेरिकी नागरिकों, कैदियों, अस्पताल के मरीजों और पूर्व सैनिकों को उनकी सहमति के बिना एलएसडी, इलेक्ट्रोशॉक, सम्मोहन (हिप्नोसिस) और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया।
लुना ने यह भी आरोप लगाया कि 1973 में तत्कालीन CIA निदेशक रिचर्ड हेल्स ने पद छोड़ने से पहले कार्यक्रम की फाइलों को नष्ट करने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने 'न्याय में बाधा' और 'संघीय अभिलेखों का आपराधिक विनाश' करार दिया। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में उन्हें और एक अन्य प्रतिनिधि एरिक बर्लिसन को MK-Ultra से जुड़े अतिरिक्त रिकॉर्ड मिलने की जानकारी पर CIA मुख्यालय बुलाया गया था, जिन्हें अब सार्वजनिक करने की प्रक्रिया चल रही है।
प्रयोगों का भयावह जाल
"पॉइजनर इन चीफ" किताब के लेखक स्टीफन किंजर ने अपनी गवाही में बताया कि इस कार्यक्रम के तहत कम से कम 149 सब-प्रोजेक्ट चल रहे थे, जिनमें 80 से ज्यादा संस्थान और 185 गैर-सरकारी शोधकर्ता शामिल थे। उन्होंने कहा, "इंसान के दिमाग और शरीर को खत्म करने के तरीकों की तलाश में MK-Ultra ने मानव पर अब तक के सबसे खतरनाक एक्सपेरिमेंट किए, जो किसी अमेरिकी सरकारी एजेंसी ने कभी नहीं किए।" किंजर ने इन प्रयोगों को किसी भी मानक से 'मेडिकल टॉर्चर' के बराबर बताया और कांग्रेस से 70 साल पुरानी फाइलों से अब सभी संपादित अंशों को हटाने की मांग की।
अधूरी जांच और छिपाई गई सच्चाई
वहीं, "कैओस" के लेखक टॉम ओ'नील ने कहा कि उनका मानना है कि कांग्रेस को इस कार्यक्रम की असलियत कभी नहीं बताई गई। उन्होंने कहा, "एजेंसी ने 1977 में कांग्रेस को गुमराह किया था जब उसने एमके-अल्ट्रा को एक असफल कार्यक्रम बताया था।" ओ'नील ने बताया कि उनके शोध में कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले CIA वैज्ञानिक सिडनी गॉटलिब और मनोचिकित्सक लुई जोल्योन वेस्ट के बीच पत्राचार मिला, जिसमें अनजाने लोगों पर एलएसडी और सम्मोहन जैसे प्रयोगों पर चर्चा की गई थी। इन दस्तावेजों में लोगों से जबरन सच उगलवाने और उनके दिमाग में झूठी जानकारी डालने के प्रयासों का भी वर्णन था।
सुनवाई के दौरान लेक्सिंगटन एडिक्शन सेंटर, होम्सबर्ग जेल, वैकाविल जेल और कई विश्वविद्यालयों के नाम सामने आए, जिनका इस्तेमाल इन गुप्त प्रयोगों के लिए किया गया था। दोनों गवाहों ने पीड़ितों की पहचान करने और बचे हुए सभी रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया।
इनपुट: IANS



