मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा पर कांग्रेस का बड़ा सवाल, PGI-D रिपोर्ट में एक भी ज़िला 60% पार नहीं
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन…
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की 'परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स' (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट का हवाला दिया है, जिसमें राज्य का एक भी जिला 60 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर सका है।
पटवारी ने इस रिपोर्ट को सरकार की शिक्षा व्यवस्था का "गंभीर रिपोर्ट कार्ड" बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रदेश के सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले को भी 600 में से केवल 333 अंक (55.5%) मिले हैं। यह आँकड़े कांग्रेस के किसी सर्वे के नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के अपने मूल्यांकन पर आधारित हैं।
प्रमुख शहरों और जिलों का प्रदर्शन कैसा रहा?
PGI-D रिपोर्ट देशभर के 784 जिलों का 70 पैमानों पर मूल्यांकन करती है, जिसमें सीखने के नतीजे, स्कूल का बुनियादी ढाँचा, बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल लर्निंग और गवर्नेंस जैसे मानक शामिल हैं। पटवारी ने पत्र में कुछ प्रमुख जिलों के प्रदर्शन का ज़िक्र किया:
- भोपाल: राजधानी को लर्निंग आउटकम में लगभग 47% और स्कूल सुरक्षा में 37% अंक मिले।
- इंदौर: इस शहर ने स्कूली सुविधाओं में करीब 41% और लर्निंग आउटकम में 47% अंक प्राप्त किए।
- डिजिटल लर्निंग: इस पैमाने पर कई जिले काफी पीछे रहे, जैसे सागर (24%), बड़वानी (16%), धार (20%) और आगर-मालवा (28%)।
कांग्रेस ने सरकार से की ये माँगें
खराब प्रदर्शन को लेकर चिंता जताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से कई ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा, "मध्य प्रदेश में बच्चों का भविष्य राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं है। सरकार आप चला रहे हैं, इसलिए जवाब आपको ही देना होगा।" कांग्रेस की प्रमुख मांगों में PGI-D नतीजों की जिला-वार सार्वजनिक समीक्षा, सीखने के परिणामों को सुधारने के लिए समयबद्ध योजना, और 30% से कम डिजिटल लर्निंग स्कोर वाले जिलों में संसाधनों और शिक्षक प्रशिक्षण का ऑडिट शामिल है। इसके अलावा, स्कूल सुरक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में सुरक्षा ऑडिट और मुख्यमंत्री स्तर पर परिणामों की तिमाही समीक्षा की भी मांग की गई है।
इनपुट: IANS



