बांग्लादेश: अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल पर ह्यूमन राइट्स वॉच ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्षता पर चिंता जताई
न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का आरोप है कि यह ट्रिब्यूनल…
न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का आरोप है कि यह ट्रिब्यूनल अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों का पालन करने में विफल रहा है, जिससे न्याय मिलने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, HRW ने चेतावनी दी है कि इन कमियों के चलते पीड़ितों को न्याय से वंचित किया जा सकता है और राजनीतिक विरोधियों को गलत तरीके से फंसाया जा सकता है।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब सोमवार को ICT के अभियोजन पक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 41 लोगों पर मानवता के विरुद्ध अपराध के औपचारिक आरोप दायर किए। ये आरोप 2013 में ढाका के शापला चत्तर में हुई हिफाजत-ए-इस्लाम रैली पर हुई कार्रवाई से संबंधित हैं।
कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल
HRW ने अपनी रिपोर्ट में ट्रिब्यूनल से जुड़े कानून की कई खामियों को उजागर किया है। संगठन के मुताबिक, यह कानून अभियोजकों को बिना पर्याप्त शुरुआती सबूतों के किसी की भी गिरफ्तारी की मांग करने की इजाजत देता है। इसके अलावा, लोगों को महीनों तक हिरासत में रखा जा सकता है और उन्हें किसी अन्य अदालत में अंतरिम अपील का अधिकार भी नहीं मिलता है।
बचाव पक्ष को तैयारी के लिए भी बहुत कम समय दिए जाने का आरोप है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष द्वारा सबूत साझा करने के सिर्फ तीन हफ्ते बाद ही सुनवाई शुरू हो सकती है। साथ ही, आरोपी की अनुपस्थिति में चलने वाले मुकदमों में भी पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं।
राजनीतिक बदले की भावना से काम न हो: HRW
ह्यूमन राइट्स वॉच की उप एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, “शेख हसीना सरकार के दौरान हुए कई कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। लेकिन कई मामलों में मुकदमे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश को अपने आपराधिक न्याय तंत्र में तुरंत सुधार करने की जरूरत है। नई सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खराब जांच और मनमाने आरोपों के जरिए राजनीतिक बदले की भावना को बढ़ावा न मिले।”
ट्रिब्यूनल की पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम
इस ट्रिब्यूनल का गठन मार्च 2010 में शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार ने किया था। इसका मूल उद्देश्य 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध करने वालों पर मुकदमा चलाना था। 2024 में अवामी लीग सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कानून में कुछ संशोधन किए थे, लेकिन HRW का मानना है कि वे भी नाकाफी थे। फरवरी 2026 में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार ने भी उन संशोधनों में कोई बदलाव नहीं किया है।
मानवाधिकार संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि 27 जुलाई को दायर किए गए आरोपों में अभियोजक और न्यायाधीश ऐसे गवाहों के बयानों पर भरोसा कर रहे हैं, जिनके कई हिस्से हूबहू एक जैसे हैं, जिससे उनकी प्रामाणिकता पर संदेह पैदा होता है।
इनपुट: IANS



