शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

कलकत्ता हाई कोर्ट की रोक: श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की जनसभा पर कानूनी अड़ंगा

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हुगली जिले के श्रीरामपुर में शुक्रवार को प्रस्तावित जनसभा पर कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ (Division Bench) ने रोक लगा दी है। दिलचस्प बात यह है कि एक…

कलकत्ता हाई कोर्ट की रोक: श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की जनसभा पर कानूनी अड़ंगा
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हुगली जिले के श्रीरामपुर में शुक्रवार को प्रस्तावित जनसभा पर कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ (Division Bench) ने रोक लगा दी है। दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले ही अदालत की एकल-न्यायाधीश पीठ (Single-Judge Bench) ने कुछ शर्तों के साथ इस बैठक की अनुमति दी थी।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने ममता बनर्जी को मुख्य वक्ता के तौर पर जनसभा करने की सशर्त मंज़ूरी तो दे दी थी, लेकिन इसके बाद होने वाली रैली को इजाजत नहीं दी थी। इस फ़ैसले के तुरंत बाद राज्य सरकार ने खुद ही इस आदेश के एक हिस्से को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ का दरवाज़ा खटखटाया।

निजी ज़मीन पर आयोजन को लेकर आपत्ति

राज्य सरकार के वकील ने खंडपीठ के सामने दलील दी कि उन्हें सभा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस निजी ज़मीन पर इसे आयोजित किया जा रहा है, उस पर आपत्ति है। वकील ने कहा, “उस जमीन का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है। अब पुलिस मालिक को किसी राजनीतिक दल को वहां राजनीतिक सभा करने की इजाज़त देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। पुलिस को निजी संपत्ति के मामले से अलग रखा जाना चाहिए। वरना, कार्यक्रम किसी दूसरी जगह पर किया जाना चाहिए।”

ज़मीन के मालिक ने भी अपनी संपत्ति पर राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन का विरोध किया है। मालिक का तर्क है कि धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली ज़मीन का उपयोग राजनीतिक मक़सद से नहीं किया जाना चाहिए।

अब शुक्रवार को होगी अगली सुनवाई

राज्य सरकार और ज़मीन मालिक की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई अब शुक्रवार को दोपहर 12 बजे होगी। मुख्य न्यायाधीश घुगे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन से पहले आम लोगों के बारे में सोचने की ज़रूरत है और ऐसे कार्यक्रम उन जगहों पर होने चाहिए जहाँ लोगों को कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा, “कृपया कोई दूसरी जगह ढूंढें।”

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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