शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

बंगाल में फर्जी डॉक्टरों पर शिकंजा: प्राइवेट अस्पतालों के लिए नियुक्ति के नए नियम जारी

पश्चिम बंगाल में फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर के सहारे डॉक्टरी करने के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य विभाग…

बंगाल में फर्जी डॉक्टरों पर शिकंजा: प्राइवेट अस्पतालों के लिए नियुक्ति के नए नियम जारी
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर के सहारे डॉक्टरी करने के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों और क्लिनिकल संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति डॉक्टर के तौर पर नियुक्त न हो पाए।

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इन नए प्रोटोकॉल के तहत, किसी भी डॉक्टर को नौकरी पर रखने से पहले निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए उनके रजिस्ट्रेशन नंबर का सत्यापन करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्देश पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण, विनियमन और पारदर्शिता) नियम, 2017 के नियम 7(4) के तहत जारी किए गए हैं, जिसमें सभी दस्तावेजों के वेरिफिकेशन पर जोर दिया गया है।

सत्यापन और कार्रवाई की प्रक्रिया

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कई लोग बिना वैध रजिस्ट्रेशन या प्रैक्टिस की अनुमति के खुद को डॉक्टर बताकर आम लोगों को भ्रमित करते हैं। इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए लाइसेंसिंग अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है।

दिशानिर्देशों में साफ कहा गया है कि अगर किसी भी डॉक्टर की पहचान, शैक्षणिक योग्यता या रजिस्ट्रेशन को लेकर जरा भी संदेह होता है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों में पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद से संपर्क साधकर डॉक्टर की योग्यता की तत्काल पुष्टि कराई जाएगी।

अगर कोई व्यक्ति फर्जी पहचान या बिना वैध रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य संगठनों ने उठाया था मुद्दा

यह मुद्दा सबसे पहले निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के एक संघ ने उठाया था। संघ ने ऐसे कई मामले उजागर किए थे, जहां निजी स्वास्थ्य केंद्रों ने बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले लोगों को नौकरी पर रख लिया था या वे निजी क्लीनिकों में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर रहे थे। संघ ने राज्य सरकार से मरीजों की जान को खतरे में डालने वाले इन अनधिकृत डॉक्टरों पर लगाम लगाने की अपील की थी। राज्य के प्रमुख डॉक्टर संगठन, पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम, ने भी सरकार के इन नए दिशानिर्देशों का स्वागत किया है।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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