CJI सूर्यकांत ने 'सुनवाई से इनकार' की खबरों पर दी सफाई, कहा- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे 24 घंटे खुले हैं
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर स्पष्टीकरण दिया है, जिनमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर…
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर स्पष्टीकरण दिया है, जिनमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत किसी भी मामले की सुनवाई से कभी इनकार नहीं कर सकती और यह उनका देश के नागरिकों से वादा है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि उस समय अदालत के सामने कोई विधिवत दायर याचिका थी ही नहीं। उन्होंने कहा, “अगर मुझे याचिका मिली ही नहीं, तो मैं सुनवाई कैसे कर सकता हूं? अगर वे एक पेज का पत्र देकर उस पर सुनवाई की मांग करते हैं, तो यह सही तरीका नहीं है।”
प्रक्रिया का पालन जरूरी
मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह गलत खबर थी कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया... हम याचिका दायर करने की सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं कर सकते। मैंने उनसे कहा कि उन्हें याचिका ठीक से दायर करनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए तत्काल सुनवाई चाहते थे, इसलिए उन्हें सही प्रक्रिया का संदेश देना पड़ा।
CJI ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट किसी भी याचिकाकर्ता की सुनवाई से कभी इनकार नहीं कर सकता। हम 24 घंटे उपलब्ध हैं।”
खुली अदालत में भी दिया स्पष्टीकरण
इससे पहले दिन में, CJI ने खुली अदालत में भी यही बात दोहराई थी। उन्होंने उन खबरों को गलत बताया, जिनमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत में कोई रिट याचिका दायर नहीं की गई थी, बल्कि सिर्फ एक अभ्यावेदन (representation) सौंपा गया था। CJI ने कहा, “मैं रिप्रजेंटेशन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं?” उन्होंने आश्वासन दिया कि जब याचिकाएं सही तरीके से दायर की गईं, तो अदालत ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा, “कानून सबसे ऊपर है। हमें इसका पालन करना होगा... अगर किसी के साथ कोई अन्याय होता है तो सुप्रीम कोर्ट कानून के दायरे में रहते हुए उसे न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कोशिश करेगा।”
इनपुट: IANS



