चीन का नया पनडुब्बी मिसाइल परीक्षण: प्रशांत क्षेत्र में क्यों बढ़ रही है परमाणु अस्थिरता?
चीन ने हाल ही में एक पनडुब्बी से परमाणु-सक्षम मिसाइल का परीक्षण किया है, लेकिन इस घटना पर दुनिया का उतना ध्यान नहीं गया जितना जाना चाहिए था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी एक बड़ी…
चीन ने हाल ही में एक पनडुब्बी से परमाणु-सक्षम मिसाइल का परीक्षण किया है, लेकिन इस घटना पर दुनिया का उतना ध्यान नहीं गया जितना जाना चाहिए था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अमेरिका का पूरा ध्यान और सैन्य संसाधन पश्चिम एशिया में ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर केंद्रित हैं।
एशिया मीडिया सेंटर की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका, चीन के इस कदम का जवाब देने में सक्षम सबसे बड़ा देश, एक दूसरे मोर्चे पर पूरी तरह से व्यस्त था। रिपोर्ट की लेखिका दिव्या मल्होत्रा का कहना है कि बीजिंग ने इसे अपने सालाना सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा बताया है, लेकिन इसके समय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा, "टोक्यो, कैनबरा और नई दिल्ली में रणनीतिक मामलों पर नजर रखने वाले लोगों ने इस बात पर जरूर ध्यान दिया होगा।"
बदलती परमाणु रणनीति का संकेत
यह मिसाइल परीक्षण चीन की बदलती परमाणु रणनीति की ओर इशारा करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, "इन सभी घटनाओं से साफ पता चलता है कि चीन अब सिर्फ सीमित और गुप्त परमाणु क्षमता रखने वाले देश की तरह नहीं रह गया है। वह अपना परमाणु भंडार बढ़ा रहा है, उसे और मजबूत बना रहा है और अब उसे खुले तौर पर दुनिया के सामने दिखाने में भी ज़्यादा सहज हो गया है।"
यह कोई अकेली घटना नहीं है। रिपोर्ट में सितंबर 2024 में चीन द्वारा प्रशांत महासागर में किए गए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षण का भी जिक्र किया गया है, जो 44 वर्षों में पहली बार था जब चीन ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसा परीक्षण किया। इसके बाद दिसंबर 2024 में जमीन आधारित साइलो-बेस्ड आईसीबीएम परीक्षण भी किए गए।
प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चिंता
दिव्या मल्होत्रा के अनुसार, पनडुब्बी से किया गया यह परीक्षण सिर्फ ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समुद्र में लगातार परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों की तैनाती की दिशा में एक सोचा-समझा कदम लगता है। यह अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा कई वर्षों से की जा रही समुद्री परमाणु गश्त की तरह है।
इस घटनाक्रम ने प्रशांत क्षेत्र, विशेषकर न्यूजीलैंड के लिए चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है, "दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र के भीतर किसी मिसाइल का गिरना सबसे पहले न्यूजीलैंड के अपने रणनीतिक पड़ोस का मामला है। इस परीक्षण से पहले भी इस पूरे क्षेत्र में बढ़ती परमाणु अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई थी।"
इनपुट: IANS



