छत्तीसगढ़: 6 साल की भतीजी से दुष्कर्म और हत्या के दोषी चाचा को मौत की सज़ा
छत्तीसगढ़ के दुर्ग की एक विशेष अदालत ने अपनी ही 6 साल की मासूम भतीजी से बलात्कार और फिर उसकी हत्या करने के जघन्य अपराध में 24 वर्षीय युवक को मौत की सज़ा सुनाई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
छत्तीसगढ़ के दुर्ग की एक विशेष अदालत ने अपनी ही 6 साल की मासूम भतीजी से बलात्कार और फिर उसकी हत्या करने के जघन्य अपराध में 24 वर्षीय युवक को मौत की सज़ा सुनाई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत गठित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने सुनाया। दोषी सोमेश यादव पर जुर्माना भी लगाया गया है।
यह दिल दहला देने वाली घटना इसी साल अप्रैल 2025 की है, जब दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र से बच्ची के लापता होने की खबर आई थी। खोजबीन के बाद बच्ची का शव उसके घर के पास ही खड़ी एक कार से बरामद हुआ था। मेडिकल जांच में बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी।
सबूतों के आधार पर हुई सज़ा
पुलिस ने मामले में चार संदिग्धों का डीएनए टेस्ट कराया, जिसमें से एक सैंपल बच्ची के चाचा सोमेश यादव से मेल खा गया। इस निर्णायक सबूत के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। IANS के मुताबिक, पूछताछ के दौरान सोमेश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद उस पर बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज कर अदालत में पेश किया गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने मेडिकल, फोरेंसिक और अन्य पुख्ता सबूत पेश कर आरोपी पर लगे सभी आरोपों को साबित किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) ने सोमेश यादव को पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या) और 238(ए) (सबूत मिटाना) के तहत दोषी ठहराया।
न्यायालय का फैसला और मुआवज़ा
अदालत ने अपराध को क्रूरतम मानते हुए दोषी को अधिकतम सज़ा, यानी मृत्युदंड दिया। इसके अलावा, बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत उस पर कुल 6,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही, सबूत मिटाने के अपराध के लिए पांच साल के कठोर कारावास की सज़ा भी सुनाई गई है, जो साथ-साथ चलेगी। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार को मुआवजा योजना के तहत 7 लाख रुपए दिए जाएं। दोषी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और उसके पास अपील के लिए कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
इनपुट: IANS



