चेक बाउंस मामला: राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 5 करोड़ जमा करने पर सरेंडर से छूट
कॉमेडियन-अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण करने से इस शर्त पर छूट दे दी है कि वे रजिस्ट्री में 5 करोड़…
कॉमेडियन-अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण करने से इस शर्त पर छूट दे दी है कि वे रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करें। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यादव और उनकी पत्नी ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सजा को बरकरार रखा गया था।
मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने सशर्त नोटिस जारी करते हुए 15 सितंबर तक जवाब मांगा है और साथ ही आदेश दिया कि अगर बुधवार तक 5 करोड़ रुपये जमा कर दिए जाते हैं तो याचिकाकर्ताओं को सरेंडर नहीं करना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद राजपाल यादव द्वारा बनाई जा रही एक फिल्म से जुड़ा है, जिसके लिए पार्टियों के बीच चार समझौते हुए थे। याचिका के मुताबिक, 21 अप्रैल, 2013 को हुए चौथे समझौते के तहत, पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस होने थे और उनकी जगह 10 करोड़ रुपये के चार नए चेक दिए जाने थे। यादव का पक्ष है कि शिकायतकर्ता ने पुराने चेक नहीं लौटाए और उन्हीं में से सात के बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जुलाई को राजपाल यादव की सजा तो बरकरार रखी थी, लेकिन इसे हर मामले में छह महीने से घटाकर तीन महीने की साधारण कैद कर दिया था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माने की राशि भी प्रत्येक मामले में 1.60 करोड़ से घटाकर 1.05 करोड़ रुपये कर दी गई थी।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा को चुनौती देने में 1,894 दिनों की अत्यधिक देरी का उल्लेख करते हुए निचली अदालतों के फैसलों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा था, “कानून कोई ऐसी स्क्रिप्ट नहीं है जिसे किसी अभिनेता की मर्ज़ी से दोबारा लिखा जा सके... अदालतें तय कानूनी सिद्धांतों और अपने सामने मौजूद रिकॉर्ड के आधार पर फैसला करती हैं।”
यादव ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया है कि हाई कोर्ट ने पार्टियों के बीच हुए बाद के सहमति समझौते पर विचार नहीं किया, जिससे मूल शिकायत की कार्यवाही समाप्त हो जानी चाहिए थी।
इनपुट: IANS



