मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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केरल: BDS छात्र आत्महत्या मामले में प्रक्रियागत चूक, सरकार ने नई SIT का गठन किया

केरल में बीडीएस छात्र नितिन राज की आत्महत्या के मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी में हुई गंभीर प्रक्रियागत खामियों के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है…

केरल: BDS छात्र आत्महत्या मामले में प्रक्रियागत चूक, सरकार ने नई SIT का गठन किया
(फोटो: IANS)

केरल में बीडीएस छात्र नितिन राज की आत्महत्या के मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी में हुई गंभीर प्रक्रियागत खामियों के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस मामले में अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) की जांच में हुई चूक पर नाराजगी जताते हुए नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं।

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यह मामला तब गरमाया जब मुख्य आरोपी डॉ. एम.के. राम को सोमवार को गिरफ्तार करने के बाद थालास्सेरी के प्रधान सत्र न्यायालय ने प्रक्रियागत कमियों के आधार पर रिहा कर दिया। अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के दौरान अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था, जिसमें आरोपी को गिरफ्तारी का लिखित आधार न देना और लोक अभियोजक को समय पर सूचित न करना शामिल था।

नई जांच टीम और कार्रवाई

गृह मंत्री ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से तत्काल रिपोर्ट मांगी है और आईजी अजीथा बेगम के नेतृत्व में एक नई SIT का गठन किया है। इसके अलावा, उत्तर क्षेत्र के आईजी को यह जांचने की जिम्मेदारी दी गई है कि पिछली जांच में चूक कैसे हुई। गृह मंत्री चेन्निथला ने आश्वासन दिया है कि पुलिस की ओर से कोई जानबूझकर लापरवाही नहीं हुई है और परिवार के संदेहों को दूर करने के लिए ही यह कदम उठाया गया है।

हालांकि, अदालत से रिहा होने के फौरन बाद क्राइम ब्रांच ने डॉ. राम को कोर्ट परिसर से फिर हिरासत में ले लिया और देर रात उन्हें दो दिन बाद पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस जारी किया। बचाव पक्ष ने इस दोबारा हिरासत को अवैध बताया है।

परिवार का आरोप और मामले की पृष्ठभूमि

दलित बीडीएस छात्र नितिन राज ने 10 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के कुछ शिक्षकों द्वारा लगातार किए जा रहे जातिगत उत्पीड़न के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। नितिन की मां ने आरोप लगाया कि पुलिस और आरोपी की मिलीभगत के चलते ही डॉ. राम को जमानत मिल सकी। परिवार का कहना है कि उनका मौजूदा क्राइम ब्रांच टीम से भरोसा उठ चुका है, हालांकि उन्होंने नई SIT के गठन का स्वागत किया है।

परिजनों का यह भी आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में जांच को लोन ऐप के एंगल से जोड़कर भटकाने की कोशिश की, जिससे मुख्य आरोपी डॉ. राम 101 दिनों तक फरार रहने में कामयाब रहा। बाद में जांच एजेंसियों ने उन्हें कर्नाटक के कोडागु से गिरफ्तार किया था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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