चेन्नई में मानसून से पहले बाढ़ से बचाव की कवायद तेज, निगम का दावा- ज्यादातर काम अंतिम चरण में
उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक से पहले चेन्नई को बाढ़ से बचाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने शहर भर में चल रही कई परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा तय कर दी…
उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक से पहले चेन्नई को बाढ़ से बचाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने शहर भर में चल रही कई परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा तय कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, निगम का लक्ष्य जुलाई से अक्टूबर के बीच नहरों की सफाई, स्टॉर्म वाटर ड्रेन और जलाशयों के सुधार से जुड़े ज्यादातर काम खत्म करना है।
जीसीसी के आयुक्त जी. एस. समीरन ने बताया कि शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शहर की 44 में से 33 नहरों में गाद निकालने और दीवारों को मजबूत करने का काम चल रहा है, जिस पर 295.25 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इनमें से 28 नहरों का काम पूरा हो चुका है। वहीं, विरुगंबक्कम और ओटेरी नुल्लाह जैसी अहम नहरों से जुड़े काम 15 अक्टूबर तक पूरे कर लिए जाएंगे।
परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति
निगम के अनुसार, स्टॉर्म वाटर ड्रेन के 155 अधूरे हिस्सों (मिसिंग लिंक) की पहचान की गई थी। लगभग 140 किलोमीटर लंबे इन हिस्सों में से 103 किलोमीटर का काम पूरा हो गया है और बाकी 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इसी तरह, 3,059 करोड़ रुपये की लागत वाली कोसस्थलैयार नदी बेसिन की एकीकृत शहरी बाढ़ प्रबंधन परियोजना 99.6% पूरी हो चुकी है और इसके इसी महीने खत्म होने की उम्मीद है। यह परियोजना तिरुवोट्टियूर और मनाली जैसे इलाकों को कवर करती है।
नागरिकों और कार्यकर्ताओं की चिंताएं
हालांकि, निगम के दावों के विपरीत स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तैयारियों पर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कई इलाकों में ड्रेनेज नेटवर्क अभी भी अधूरा है, नालों की सफाई ठीक से नहीं हुई है और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी है। इन समस्याओं के चलते शहर पर एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
कार्यकर्ताओं ने खुले बिजली के तारों और गलत तरीके से लगे कैचपिट कवर जैसी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया है, जो तैयारियों में कमी को दर्शाते हैं। दूसरी तरफ, निगम का कहना है कि डीमेलोज रोड और आर्कोट रोड पर स्टॉर्म वाटर ड्रेन का काम क्रमशः सितंबर और अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। वहीं, कुछ बड़ी परियोजनाएं जैसे कोवलम बेसिन और माधवरम ड्रेन प्रोजेक्ट को पूरा होने में 2026-27 तक का समय लगेगा।
इनपुट: IANS



