गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

देश में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा, सरकार ने 4,744 करोड़ की 22 परियोजनाओं को दी हरी झंडी

भारत में अनुसंधान, विकास और नवाचार (R&D) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत केंद्र सरकार ने 4,744 करोड़ रुपये की लागत वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…

देश में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा, सरकार ने 4,744 करोड़ की 22 परियोजनाओं को दी हरी झंडी
(फोटो: IANS)

भारत में अनुसंधान, विकास और नवाचार (R&D) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत केंद्र सरकार ने 4,744 करोड़ रुपये की लागत वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) द्वारा रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के तहत स्वीकृत किया गया है, जिसके लिए 2,192 करोड़ रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है।

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यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में दी। उन्होंने बताया कि इन 22 परियोजनाओं के अलावा, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) ने भी 390.35 करोड़ रुपये की आठ अन्य परियोजनाओं को सहायता के लिए शॉर्टलिस्ट किया है।

RDI फंड का प्रबंधन और आवंटन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, TDB और BIRAC को RDI फंड के तहत 'फोकस्ड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन' श्रेणी में सेकेंड लेवल फंड मैनेजर (SLFM) के तौर पर चुना गया है। अब तक, इन दोनों संस्थाओं को पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं और कंपनियों में निवेश के लिए 1,000-1,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड को मंजूरी दी थी और इसका औपचारिक शुभारंभ नवंबर 2025 में हुआ। फंड के तहत SLFM के चयन के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए गए थे, जिसमें अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) से 162 और फोकस्ड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (FRO) से 38 आवेदन मिले हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इन आवेदनों पर प्रक्रिया जारी है और इनके लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता प्रस्तावित है।

इन क्षेत्रों पर रहेगा खास ध्यान

RDI फंड का मुख्य उद्देश्य कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना है। इनमें ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन से निपटना, डीप टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शामिल हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कृषि, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोग को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

निजी क्षेत्र का बढ़ता योगदान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश के बढ़ते आंकड़ों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने राज्यसभा को बताया कि 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निजी निवेश दर्ज किया जा चुका है। पिछले कुछ वर्षों में निजी निवेश में लगभग छह गुना की वृद्धि देखी गई है, जो 2021-22 के 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 348.5 मिलियन डॉलर और 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

मंत्री ने यह भी कहा कि देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में सिर्फ एक थी, जो आज 400 से अधिक हो चुकी है। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और व्यावसायिक परिपक्वता को दर्शाता है।

इनपुट: IANS

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