CBI का 'डिजिटल अरेस्ट' रैकेट पर बड़ा एक्शन, 2 करोड़ की ठगी में ओडिशा-राजस्थान से 3 गिरफ्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से हुई 2.07 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एजेंसी ने इ
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से हुई 2.07 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एजेंसी ने इस सिलसिले में ओडिशा और राजस्थान में कई स्थानों पर छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रही है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान ओडिशा के बालासोर निवासी बिबेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य के रूप में हुई है, जबकि तीसरे आरोपी कन्हैया लाल को राजस्थान के नागौर से पकड़ा गया। इन पर एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप है, जो खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाता था।
कैसे हुई थी 2 करोड़ की ठगी?
इस मामले में 25 मार्च को एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को फर्जी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया और उन्हें 'डिजिटली अरेस्ट' करने की धमकी दी। इस तरह डरा-धमका कर उन्होंने पीड़ित से अलग-अलग लेनदेन के जरिए 2.07 करोड़ रुपये अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
जांच में पता चला है कि ठगी से मिली इस रकम को छिपाने के लिए एक जटिल तरीका अपनाया गया था। आरोपी पैसे को कई बैंक खातों से गुजारते थे, जिसे 'लेयरिंग' कहते हैं, ताकि पैसे के असली स्रोत का पता न चल सके। सीबीआई के मुताबिक, पूरी रकम अंत में एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में जमा की गई थी।
छापेमारी और आगे की जांच
सीबीआई ने 30 जून को ओडिशा और राजस्थान में कुल सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन सबूतों से इस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य लाभार्थियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
इनपुट: IANS



