कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक की अर्ज़ी, 14 सितंबर को होगी सुनवाई
कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट 14 सितंबर को कर्नाटक की याचिका पर सुनवाई करेगा। कर्नाटक ने यह अपील तमिलनाडु को पानी छोड़ने के आदेश के खिलाफ दायर…
कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट 14 सितंबर को कर्नाटक की याचिका पर सुनवाई करेगा। कर्नाटक ने यह अपील तमिलनाडु को पानी छोड़ने के आदेश के खिलाफ दायर की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने शुक्रवार को मांड्या में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कानूनी विशेषज्ञों ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के आदेश का पालन करते हुए सोमवार तक तमिलनाडु को पानी देना जारी रखना ज़रूरी है। विशेषज्ञों का मानना था कि आदेश का उल्लंघन कर सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने से याचिका खारिज हो सकती है।
राज्य की दुविधा और किसानों का हित
मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने सरकार की मुश्किल स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि एक तरफ कर्नाटक खुद पानी की भारी कमी से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ उसे संघवाद के संवैधानिक ढांचे और अदालत के आदेशों का सम्मान भी करना है। उन्होंने कहा, "सरकार हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। हमारे अधिकारी और कानूनी टीम अदालत के सामने मजबूत पक्ष रख रहे हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा हालात में पिछले 20 वर्षों में यह सबसे कम मात्रा में कावेरी जल है जो तमिलनाडु को दिया गया है। अतीत में भी ऐसी ही मुश्किल स्थितियों के दौरान राज्य ने लगभग 35 टीएमसी पानी छोड़ा था। फिलहाल, किसानों की फसलों को बारी-बारी से पानी दिया जा रहा है और टैंक भरने के प्रयास भी जारी हैं।
पेयजल और अन्य परियोजनाएं
चेलुवरयास्वामी ने भरोसा दिलाया कि कावेरी बेसिन के चार बड़े जलाशयों में पर्याप्त पानी सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि दिसंबर से जून तक पीने के पानी की कोई कमी न हो। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में न उलझने की अपील करते हुए कहा कि कर्नाटक के भाजपा सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को महादयी और मेकेदातु परियोजनाओं के लिए केंद्र से मंजूरी दिलाने की दिशा में काम करना चाहिए, जिससे राज्य की जल समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) के शुरुआती प्रयास उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रहे, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि गौरी-गणेश त्योहार के बाद मौसम अनुकूल होने पर बेहतर परिणाम मिलेंगे।
इनपुट: IANS



